देशभर में अब नई पाउडर तकनीक से पहुंचेगा ऊंटनी का दूध..!

<p><em>राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसन्धान केन्द्र (एनआरसीसी) द्वारा ऊंटनी के दूध पाउडर की नूतन प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण से अब देश भर में ऊंटनी के दूध की उपलब्धता सुलभ हो सकेगी। इस प्रयोजन के लिए एनआरसीसी एवं पर्ल लेक्टो कंपनी के मध्य एक महत्वपूर्ण एमओयू किया गया। एमओयू पर केन्द्र के निदेशक डॉ. आर्तबन्धु साहू एवं पर्ल लेक्टो कंपनी के संस्थापक अमन ढिल द्वारा हस्ताक्षर किए गए तथा इसके साथ ही नूतन प्रौद्योगिकी हस्तांतरण का शुभारंभ भी किया गया।</em></p>

देशभर में अब नई पाउडर तकनीक से पहुंचेगा ऊंटनी का दूध..!
12-01-2023 - 06:26 PM
21-04-2026 - 12:04 PM

केन्द्र के निदेशक डॉ.आर्तबन्धु साहू ने ऊंटनी के दूध का पाउडर बनाने से जुड़ी इस नूतन प्रौद्योगिकी के संबंध में खुशी जाहिर करते हुए कहा कि केन्द्र के वैज्ञानिकों ने नवीन तकनीकों का उपयोग करके गुणवत्तायुक्त उत्पाद बनाने की विधि विकसित की है जिससे कि ऊंटनी के दूध में मौजूद औषधीय गुण भी बरकरार रहते हैं। डॉ.साहू ने यह भी कहा कि ऊंटनी के दूध में विद्यमान गुणधर्मों के आधार पर इसे ‘औषधीय भण्डार’ कहा जाना कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी क्योंकि एनआरसीसी वैज्ञानिकों ने यह साबित किया है कि इसका दूध मधुमेह, क्षय रोग, ऑटिज्म आदि के प्रबंधन में कारगर है।

अब फलेवर्ड मिल्क के रूप में उपलब्ध होगा दूध
साथ ही केन्द्र द्वारा ऊंटनी के दूध से विभिन्न स्वादिष्ट उत्पाद विकसित किए गए हैं। इसके अलावा वैश्विक शोध ने भी इसके महत्व को दशार्या है, नतीजतन देशभर में ऊंटनी के दूध की मांग तेज होने लगी है। डॉ.साहू ने ऊंटनी के दूध की उद्यमिता पर व्यावहारिक विचार रखते हुए कहा कि ऊंटनी के दुग्ध उत्पादन, संग्रहण, प्रसंस्करण, शीतलीकरण एवं आपूर्ति आदि को लेकर व्यावहारिक चुनौतियां देखने में आ रही थी, अब एनआरसीसी द्वारा पर्ल लेक्टो कंपनी के साथ तकनीकी हस्तांतरण को लेकर किए गए।

इस एमओयू से ऊंटनी के दूध का पाउडर एवं इससे निर्मित उत्पाद जरूरतमंद उपभोक्ताओं को सुलभ हो सकेंगे। केन्द्र द्वारा ऊंट की बहुआयामी उपयोगिता तलाशे जाने की दिशा में बढ़ी इस नई पहल (एमओयू) को ऊंट पालकों के लिए विशेष महत्व वाला बताते हुए डॉ.साहू ने कहा कि ऊंट पालकों को इसका सीधा लाभ मिल सकेगा। डॉ.साहू ने इस अवसर पर अपील की कि अब ऊंट पालक, उष्ट्र दुग्ध व्यवसाय की सोच को पूरी तहर से अपनाते हुए इस दिशा में आगे बढ़े जिससे उष्ट्र दुग्ध व्यावसायीकरण के रूप में परिणत करने में मदद मिल सके।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।