आखिर श्रीलंका पहुंच ही गया चीनी पोत युआंग वांग-5
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भारत का श्रीलंका पर बनाया गया दबाव आखिरकार किसी काम नहीं आया। चीन का युद्धयोपत युआन वांग-5 श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह पर पहुंच ही गया और वहां उसका जोरदार स्वागत भी किया गया। चीन के इस जासूसी युद्धपोत के श्रीलंका आगमन को लेकर कुछ दिनों पहले भारत ने अपनी चिंता से उसे अवगत भी करवा दिया था। यद्यपि श्रीलंका ने भारत की चिंताओं के मद्देनजर चीन से इस टोही युद्धपोत की यात्रा टालने को कहा था लेकिन शनिवार,13 अगस्त को श्रीलंका ने 16 से 22 अगस्त तक जहाज को बंदरगाह आने की अनुमति प्रदान कर ही दी। और, यह युद्धपोत श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह पर जा पहुंचा।
उल्लेखनीय है कि युआन वांग 5 चीन का ट्रैकिंग शिप है और यह चीन की तरफ से उपग्रह और बैलिस्टिक मिसाइल के ट्रैकिंग और सपोर्ट में उपयोग में लाया जाता है। युआन वांग केवल एक जहाज नहीं है बल्कि यह जहाजों का समूह है। युआन वांग के तहत अलग-अलग जहाजों की पूरी श्रृंखला है। युआन वांग समूह के जहाजों में युआन वांग 1 से लेकर युआन वांग 7 अलग-अलग जहाज कई वर्षों में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी में शामिल हुए। युआन वांग-1 चीन की आर्मी में 1977 में शामिल हुआ। युआन वांग 21 और युआन वांग 22 भी है जो कि ट्रांसपोर्ट शिप है।
रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक हंबनटोटा बंदरगाह पर जो युआन वांग-5 युद्धपोत पहुंचा है, वह युआन वांग सीरीज की तीसरी जेनरेशन का ट्रैकिंग जहाज है और यह वर्ष 2007 से चीन की आर्मी की सेवा में शामिल है। ये दोहरे उपयोग वाला जासूसी जहाज है जो इंटर कांटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल का भी पता लगा सकता है। इसका वजन करीब 23,000 टन है और इस पर 400 नौसैनिकों का दल सरलता से यात्रा कर सकता है। इस जहाज पर कई तरह के सेंसर्स लगे हैं। इसे चीन के 708 अनुसंधान संस्थान द्वारा डिजाइन किया गया था।
विशेषज्ञों का कहना है कि आमतौर पर यह युद्धपोत तब आवाजाही शुरू करता है जब चीन या कोई अन्य देश मिसाइल परीक्षण कर रहा होता है। यह युद्धपोत करीब 750 किलोमीटर दूर तक आसानी से निगरानी कर सकता है। यह युद्धपोत पैराबोलिक ट्रैकिंग एंटीना और कई सेंसर्स से लैस है। इस शिप में हाई-टेक ईव्सड्रॉपिंग इक्विपमेंट लगे हैं यानी छुपकर सुनने वाले उपकरण मौजूद हैं। उल्लेखनीय यह भी है कि वर्ष 2017 में श्रीलंका ने ऋण ना चुका पाने की स्थिति में दक्षिण में स्थित हंबनटोटा बंदरगाह को 99 साल की लीज पर चीन को सौंप दिया था।
बैलेस्टिक मिसाइल एवं उपग्रह का पता लगाने में सक्षम जहाज ‘युआन वांग-5’ स्थानीय समयानुसार सुबह 8 बजकर 20 मिनट पर दक्षिणी बंदरगाह हंबनटोटा पर पहुंचा। यह 22 अगस्त तक वहीं रुकने वाला है।
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