देश को बर्बाद करने की पीएफआई की खतरनाक रणनीति..! पीएम मोदी को भी निशाना बनाने की थी कोशिश
देश के प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी का कहना है कि पॉपुल फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) ने पटना रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी अपना शिकार बनाने की कोशिश की थी। ईडी के अनुसार पीएफआई टेरर मॉड्यूल तैयार करने और अन्य हमलों की भी तैयारी कर रहा था।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, केरल से गिरफ्तार हुए पीएफआई कार्यकर्ता शफीक पायेथ के रिमांड नोट में ईडी ने ऐसे ही सनसनीखेज दावे किए हैं। ईडी का तो दावा है कि पीएफआई ने इस साल 12 जुलाई को पीएम मोदी के पटना दौरे पर हमला करने के लिए प्रशिक्षण शिविर लगाया था। वर्ष 2013 में इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े आतंकियों ने भी उनकी रैली में धमाका किया था।
उल्लेखनीय है कि देश भर में पीएफआई के 90 से ज्यादा ठिकानों पर छापेमारी की गई और 100 से ज्यादा उसके पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है। इस संगठन के मंसूबे देश को बर्बादी की ओर ले जाने वाले थे। यदि ये मंसूबे कामयाब हो जाते तो देश ऐसी आग में झोंक दिया जाता कि संभाले नहीं संभलता।
अपनी रणनीति को सफल बनाने के लिए पीएफआई चार स्तरों पर काम कर रहा था। पहला, मुस्लिमों को उनके प्रति अत्याचारों मनढ़ंत कहानियां सुनाकर भड़काना और हथियारों का पशिक्षण देना। दूसरा, मुस्लिमों की परेशानियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित करना। तीसरा, राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) और अन्य पिछड़ा वर्ग के बीच मतभेद पैदा करना। चौथा, देश की न्यायपालिका, सेना, पुलिस और राजनीति में वफादार मुस्लिमों की घुसपैठ कराना।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पहले चरण में पीएफआई ने मुस्लिम समुदाय को उनके प्रति कथित अत्याचारों को याद दिलाया और यह समझाने की कोशिश की कि वही एकमात्र संगठन है जो मुस्लिम समुदाय का नेतृत्व कर सकता है। सूत्रों के अनुसार यह विवादित संगठन युवाओं को लोहे की रॉड से मारने और अन्य हथियार चलानेका प्रशिक्षण देना चाहता था।
दूसरे चरण में पीएफआई चाहता था कि मुस्लिमों के मुद्दों को उसके नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जाया जाये। संगठन को यकीन था कि समय-समय पर होने वाली हिंसा मुस्लिमों पर होने वाले अत्याचारों को प्रदर्शित करती। पीएफआई ने कथित रूप से यह सलाह भी दी थी कि बड़े लक्ष्य के लिए खुद को होने वाली क्षति को ज्यादा तवज्जो न दो।
तीसरे चरण की रणनीति के तहत पीएफआई के सदस्यों से कहा गया था कि वे अनुसूचित जाति-जनजाति और ओबीसी वर्ग के हिंदुओं का साथ दें। उनके और आरएसएस के बीच दूरियां पैदा करें। इसके साथ ही उनसे हथियार जुटाने के लिए भी कहा गया। चौथे चरण की रणनीति में पीएफआई चाहता था कि उसके वफादार लोग न्यायपालिका, पुलिस, सेना और राजनीति में घुसपैठ कर लें ताकि धीरे-धीरे इस्लामिक सिद्धांतों पर आधारित संविधान बनाया जा सके। इसमें हथियारों और सिस्टम का भरपूर इस्तेमाल किया जाता।
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