जी-20 में मार लिया मैदान: महीनों से मिशन में लगे थे डोभाल और जयशंकर
<p><em><strong>जी-20 देशों के नेताओं का पीएम मोदी से मिलने का उतावलापन और उनकी कही बात ‘यह युग युद्ध का नहीं’ की गूंज... बाली में हुए जी-20 समिट में भारतीय कूटनीति सुपरहिट रही। वजह, भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और एनएसए अजीत डोभाल की बैक चैनल डिप्लोमेसी, जो सालभर पहले ही प्रारंभ हो गई थी।</strong></em></p>
इंडोनेशिया के बाली में जुटे दुनिया के 20 देशों के महाबली नेता। 17वें जी-20 शिखर सम्मेलन में भारत की कूटनीति का जलवा अपने चरम पर नजर आया। सम्मेलन में आकर्षण का केंद्र रहे, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन हों या कोई और राष्ट्राध्यक्ष, हर कोई भारतीय प्रधानमंत्री से हाथ मिलाने को बेताब दिखा। यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को दी गई प्रधानमंत्री मोदी की ‘यह युद्ध का दौर नहीं’ वाली सलाह बुधवार को जारी ‘बाली डेक्लेरेशन’ का हिस्सा है।
जी-20 समिट में भारतीय कूटनीति की धाक देखने को मिली। विदेश मंत्री एस. जयशंकर और एनएसए अजित डोभाल पर्दे की पीछे चुपचाप अपने मिशन में लगे थे। प्रधानमंत्री मोदी की ताबड़तोड़ द्विपक्षीय बैठकें जारी थीं। कभी फ्रांस के राष्ट्रपति से तो कभी सिंगापुर के प्रधानमंत्री के साथ, कभी जर्मनी की चांसलर तो कभी ऑस्ट्रेलिया के पीएम के साथ, कभी इटली की प्रधानमंत्री के साथ तो कभी सिंगापुर के पीएम के साथ...पीएम मोदी लगातार द्विपक्षीय बैठकों में मशगूल रहे।
खास बात यह है कि बुधवार को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की प्रस्तावित मुलाकात आखिरी वक्त पर रद्द हो गई। वजह शेड्यूलिंग की बताई गई लेकिन पीएम मोदी और सुनक की अहम द्विपक्षीय मुलाकात हुई। यह सब भारत की बढ़ती धाक और भारतीय कूटनीति के कौशल का ही नतीजा है।
मंगलवार को समिट शुरू होने से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गर्मजोशी भरी मुलाकात को पूरी दुनिया ने देखा। मुलाकात में दोनों नेताओं की आपसी केमिस्ट्री दिखी।
मंगलवार को बाली में एक और मुलाकात की तस्वीरें चर्चित हुईं। ये मुलाकात थी, पीएम मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की। 2020 में गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद मोदी और जिनपिंग की ये पहली मुलाकात थी। कह सकते हैं कि यह मुलाकात संयोग से हुई लेकिन कूटनीति में कुछ भी संयोग से नहीं होता। दोनों नेताओं की इस संक्षिप्त मुलाकात के पीछे कोई बैकडोर डिप्लोमेसी रही हो, इससे इनकार नहीं किया जा सकता।
बाली डेक्लेरेशन में पीएम मोदी की छाप
बुधवार को जारी हुए जी-20 बाली लीडर्स डेक्लेरेशन में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्पष्ट छाप है। डेक्लेरेशन के चौथे पॉइंट में पीएम मोदी की रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को दी गई उस चर्चित सलाह को रखा गया है, यह 'युद्ध का दौर' नहीं है। डेक्लेरेशन में कहा गया है, ‘संघर्षों का शांतिपूर्ण समाधान, संकट को हल करने की कोशिशों के साथ-साथ कूटनीति और बातचीत महत्वपूर्ण हैं। आज का युग युद्ध का तो नहीं ही होना चाहिए।’
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