Makar Sankranti 2023 : मकर संक्रांति पर ऐसे करें सूर्यदेव की पूजा और जानें अपनी राशि के अनुसार क्या करें दान..

<p><em>Makar Sankranti 2023 : मकर संक्रांति के दिन सूर्य शनिदेव की राशि मकर में प्रवेश करते हैं इसलिए इस दिन सूर्यदेव के साथ शनिदेव की भी पूजा करनी चाहिए।</em></p>

Makar Sankranti 2023 : मकर संक्रांति पर ऐसे करें सूर्यदेव की पूजा और जानें अपनी राशि के अनुसार क्या करें दान..
12-01-2023 - 11:27 PM
21-04-2026 - 12:04 PM

Makar Sankranti 2023 के दिन सुबह उठकर सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान आदि करके साथ-सुथरे वस्त्र धारण कर लें। इसके बाद एक तांबे के लोटे में जल भर लें और उसमें थोड़ा सा सिंदूर, अक्षत और लाल फूल डालकर भगवान सूर्य को अर्घ्य दें। इसके साथ ही मकर संक्रांति के अवसर पर भगवान सूर्य को गुड़, तिल, खिचड़ी आदि का भोग लगाएं। इसके साथ विधिवत् आरती कर लें।

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राशि के अनुसार दान :- मकर संक्रांति पर विभिन्न राशियों के जातकों द्वारा किया जाने वाला दान इस प्रकार है

  1. मेष       :- गुड, मूंगफली, दाल एवं तिल
  2. वृषभ     :- सफेद कपड़ा, दही ,चावल एवं तिल
  3. मिथुन    :- मूंग दाल, कंबल एवं चावल
  4. कर्क      :- चावल, सफेद तिल, चांदी और मोती
  5. सिंह      :- तांबा ,गेहूं और तिल
  6. कन्या     :- हरा कपड़ा, कंबल और खिचड़ी
  7. तुला      :- सफेद कपड़ा, शक्कर एवं खीर
  8. वृश्चिक    :- लाल कपड़ा, मूंगा एवं तिल
  9. धनु        :- हल्दी ,पीला कपड़ा एवं सोना
  10. मकर     :- काला कंबल, तेल एवं काले तिल
  11. कुंभ      :- काली उड़द, खिचड़ी एवं काले तिल
  12. मीन       :- रेशमी कपड़ा ,चने की दाल एवं  तिल

 भारतवर्ष में मकर सक्रांति के विभिन्न रूप – मकर सक्रांति का पर्व संपूर्ण भारतवर्ष में किसी न किसी रूप में मनाया जाता है l इनमें से कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं l

पोंगल :- पोंगल, दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु, केरल एवं आंध्र प्रदेश में,धान की फसल कटने के बाद खुशी के तौर पर किसानों द्वारा 3 दिन मनाया जाने वाला त्योहार है l

उत्तरायण :- उत्तरायण विशेष तौर पर गुजरात में पतंग उड़ा कर एवं उपवास रखकर मनाया जाता है l इस दिन तिल व मूंगफली की चिक्की, गुड़ पट्टी, गजक आदि बनाई ओर खायी जाती है I

लोहड़ी :- फसल की कटाई के बाद पंजाब में मनाया जाने वाला प्रमुख त्योहार है लोहड़ीI इस दिन तिल, गुड़, मकई के फुल्ले, मूंगफलियां आदि की आहुति अग्नि में देते है ओर खाते भी है I

बिहू :- भारत के उत्तर पूर्व (नार्थ ईस्ट) राज्य असम में भोगली बिहू पर्व मनाया जाता है I बिहू पर्व में होलिका (लकड़ियों का ढेर ) जलाया जाता है I यह त्योहार भी किसानों के तिल, चावल, नारियल ओर गन्ने की फसल की कटाई के बाद मनाया जाता है I

खिचड़ी :- भारत के पूर्वी हिस्से उत्तर प्रदेश ओर बिहार में इस पर्व को खिचड़ी त्योहार के रूप में जाना जाता है I इस दिन पवित्र नदियों में डुबकी लगा कर दिन का प्रारम्भ किया जाता है I प्रयागराज माघ कुम्भ इसी समय शुरू होता है I इस दिन दही-चिवड़ा ओर तिल के लड्डू खाये जाते है और रात में मिश्रित अनाज की खिचड़ी बनायी जाती है जिसे भगवान को भोग लगाने के बाद प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है I

सकरात :- मध्यप्रदेश में सकरात पर्व मनाया जाता है I यह पर्व बिहार, छत्तीसगढ़, झारखण्ड, और सिक्किम में भी मनाया जाता है I तिल और गुड़ से बनी मिठाइयों से इस पर्व को मिठास और बढ़ जाती है I

मगही:- हरियाणा और हिमाचल के क्षेत्रों में मकर संक्रांति को मगही पर्व के रुप में भी मनाया जाता है I

कश्मीर:- कश्मीर में मकर सक्रांति को शिशुर संक्रांति के नाम से जाना और मनाया जाता है I

मकर संक्रांति से जुड़ी पौराणिक कथाएं:- भारतवर्ष में मनाये जाने वाले विभिन्न त्योहारों के पीछे कोई ना कोई पुरानी कथा अवश्य होती है जो उस पर्व में छिपे हुए मर्म को अपने अंदर समेटे हुए होती है l तो आइए जानते हैं मकर सक्रांति से जुड़ी हुई कुछ पौराणिक कथाओं को ...........

  1. राजा भगीरथ और राजा सगर के पुत्रों से जुड़ी है कथा :-  कपिल मुनि पर देवराज इंद्र के घोड़े चोरी करने का झूठा आरोप राजा सगर के पुत्रों ने लगाया था जिससे क्रोधित होकर कपिल मुनि राजा सगर के 60 हजार पुत्रों को श्राप दिया और वे जलकर भस्म हो गए थे। जब इस बात की जानकारी राजा सगर को हुई तो उन्होंने कपिल मुनि से क्षमा मांगी l उनकी क्षमा याचना पर कपिल मुनि ने उन्हें एक उपाय सुझाया कि आपको मां गंगा को कैसे भी करके पृथ्वी पर लाना होगा। इसके लिए राजा सगर के पोते अंशुमान और उनके बाद राजा भगीरथ ने कड़ी तपस्या की जिससे प्रसन्न होकर मां गंगा प्रकट हुईं। उन्होंने मां गंगा से कपिल मुनि के आश्रम तक आने का अनुराध किया जिसके बाद मां गंगा ने सगर पुत्रों को मोक्ष प्रदान किया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जिस दिन राजा सगर के 60 हजार पुत्रों को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी उस दिन मकर संक्रांति थी।
  2. सूर्यदेव एवं शनिदेव से जुड़ी कथा :- शनि देव का रंग काला है। इस वजह से उनके पिता सूर्य देव उनको पंसद नहीं करते थे। सूर्य देव ने शनि देव को उनकी माता छाया से अलग कर दिया था। इससे दुखी होकर छाया ने सूर्य देव को कुष्ठ रोग होने का श्राव दे दिया. सूर्य देव कुष्ठ रोग से पीड़ित हो गए। तब सूर्य देव की दूसरी पत्नी के बेटे यमराज ने अपने कठोर तप से पिता सूर्य देव को स्वस्थ कर दिया।

कुष्ठ रोग से मुक्ति पाने के बाद सूर्य देव ने क्रोध में आकर शनि देव और छाया के घर कुंभ को जला दिया। इस वजह से छाया और शनि देव काफी दुखी हुए। उधर यमराज ने सूर्य देव को छाया और शनि देव के साथ ऐसा व्यवहार न करने की सलाह दी। सूर्य देव का क्रोध जब शांत हुआ तो वे एक दिन पुत्र शनि देव और पत्नी छाया के घर गए।

सूर्य देव ने देखा कि शनि के घर में कुछ भी नहीं बचा था। सब कुछ जलकर राख हो गया था। शनि देव के घर केवल काला तिल बचा था। उस काले तिल से ही शनि देव ने पिता सूर्य देव का स्वागत किया। यह देखकर सूर्य देव खुश हुए और शनि देव को दूसरा घर मकर प्रदान किया। साथ ही शनि देव को वरदान दिया कि जब वे मकर संक्रांति पर उनके घर यानी मकर राशि में आएंगे, तो उनका घर धन-धान्य से भर जाएगा। जो इस दिन काले तिल से सूर्य देव की पूजा करेगा, उसके सभी कष्ट दूर हो जाएंगे।

सूर्य देव ने जब मकर संक्रांति पर शनि देव के घर यानी मकर राशि में प्रवेश किया, तो उनको पूरा घर धन-धान्य से भर गया। इस वजह से हर साल मकर संक्रांति पर काले तिल से सूर्य की पूजा की जाती है और काले तिल, तिल के लड्डू का दान किया जाता है। काले तिल से पूजा करने पर सूर्य देव और शनि देव दोनों ही प्रसन्न होते हैं।

3. श्री भगवत् गीता में उल्लेखः- श्रीमद्भागवत के आठवें अध्याय में भगवान श्री कृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि उत्तरायण का समय ब्रह्म की गति प्राप्त करने का समय होता है जबकि दक्षिणायन का समय जन्म और मृत्यु के बंधनों से संबंध रखता है। महाभारत में भी भीष्म पितामह सरसैया पर लेटे हुए अपने प्राण  त्यागने के लिए सूर्य के उत्तरायण आने अर्थात् मकर संक्रांति के दिन की प्रतीक्षा करते हैं ताकि वह ब्रह्म की गति को प्राप्त कर सकें और ब्रह्मलीन हो सकें l

 

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।