बंगाल में बिना पैसे दिए नौकरी नहीं, ममता सरकार पर बरसा हाई कोर्ट
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क्या कहेंगे उस सरकार को, जिस पर वहां की सबसे बड़ी बड़ी अदालत सरेआम अंगुली उठा दे..! जी हां, पश्चिम बंगाल एक ऐसा ही राज्य बन गया है। वहां के कलकत्ता हाई कोर्ट का कहना है कि यहां बिना पैसे दिये कोई सरकारी नौकरी हासिल ही नहीं कर सकता और न ही उसे सुरक्षित या बरकरार रख सकता है। कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय की बेंच ने एक सरकारी स्कूल में प्राथमिक शिक्षक की बर्खास्तगी के मामले की सुनवाई के दौरान यह बात कही। हाई कोर्ट की इस तल्ख टिप्पणी में पश्चिम बंगाल प्राथमिक शिक्षा बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष और तृणमूल कांग्रेस के विधायक माणिक भट्टाचार्य का भी जिक्र किया।
जस्टिस गंगोपाध्याय ने कहा कि शायद वादी ने माणिक भट्टाचार्य को पैसे नहीं दिये और इसलिए उनका रोजगार समाप्त कर दिया गया। पश्चिम बंगाल एक ऐसा राज्य बन गया है, जहां कोई भी व्यक्ति बिना पैसे दिये राज्य सरकार की नौकरी हासिल नहीं कर सकता है।
क्या है पूरा मामला मामला
जिस मामले पर जस्टिस गंगोपाध्याय की ओर से इतनी तल्ख टिप्पणी की गई है, वह मिराज शेख की ओर से दायर मुकदमे से ताल्लकु रखता है। जिसे दिसंबर 2021 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के एक सरकारी स्कूल में प्राथमिक शिक्षक के रूप में नियुक्त किया गया था। हालांकि, सेवा में शामिल होने के ठीक चार महीने बाद, डब्ल्यूबीबीपीई की ओर से यह कहते हुए टीचर की सेवा समाप्त कर दी गई कि उनके पास बोर्ड के मानदंडों के अनुसार आरक्षित श्रेणी में नियुक्त होने के लिए ग्रेजुएशन में 45 प्रतिशत के योग्यता अंक नहीं हैं।
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