मन की बात में बोले पीएम मोदी: ‘नीयत साफ और प्रयासों में ईमानदारी हो, तो फिर कोई भी लक्ष्य कठिन नहीं रहता’
<p><em><strong>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के जरिए देशवासियों को संबोधित किया। पीएम मोदी ने कहा कि 2025 तक भारत का संकल्प टीबी मुक्त देश का है। इस दौरान उन्होंने बिपरजॉय तूफान का जिक्र करते हुए कच्छ के लोगों की तारीफ भी की। </strong></em></p>
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज एक बार फिर अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के जरिए देशवासियों को संबोधित किया। पहली बार यह कार्यक्रम अपने तय समय से एक हफ्ता पहले प्रसारित किया गया। इस बारे में पीएम मोदी ने बताया कि अगले हफ्ते होने वाले अपने अमेरिकी दौरे की व्यस्तता के चलते वह तय समय से पहले लोगों को संबोधित कर रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा कि मैं जब भारत के सामान्य मानवी के प्रयास, उनकी मेहनत, उनकी इच्छाशक्ति को देखता हूँ, तो खुद अपने आप, अभिभूत हो जाता हूं।।
बिपरजॉय का किया जिक्र
चक्रवाती तूफान बिपरजॉय का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, ‘बड़े से बड़ा लक्ष्य हो, कठिन-से-कठिन चुनौती हो, भारत के लोगों का सामूहिक बल, सामूहिक शक्ति, हर चुनौती का हल निकाल देता है। बिपरजॉय ने कच्छ में कितना कुछ तहस-नहस कर दिया, लेकिन, कच्छ के लोगों ने जिस हिम्मत और तैयारी के साथ इतने खतरनाक चक्रवात का मुकाबला किया, वो भी उतना ही अभूतपूर्व है। प्राकृतिक आपदाओं पर किसी का जोर नहीं होता, लेकिन, बीते वर्षों में भारत ने आपदा प्रबंधन की जो ताकत विकसित की है, वो आज एक उदाहरण बन रही है।
प्रकृति के संरक्षण में है उपाय
उन्होंने कहा, ‘प्राकृतिक आपदाओं से मुकाबला करने का एक बड़ा तरीका है, प्रकृति का संरक्षण। आजकल, मानसून के समय में तो, इस दिशा में, हमारी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। इसीलिए ही आज देश, ‘कैच द रेन’ जैसे अभियानों के जरिए सामूहिक प्रयास कर रहा है।’ प्रधानमंत्री ने कहा कि ये नदी, नहर, सरोवर, ये केवल जल-स्रोत ही नहीं होते हैं, बल्कि इनसे, जीवन के रंग और भावनाएं भी जुड़ी होती हैं। उन्होंने कहा, श्जब प्रबंधन की बात हो रही है, तो मैं, आज, छत्रपति शिवाजी महाराज को भी याद करूंगा। छत्रपति शिवाजी महाराज की वीरता के साथ ही उनकी गवर्नेंस और उनके प्रबंध कौशल से भी बहुत कुछ सीखने को मिलता है।
शिवाजी महाराज के प्रबंध कौशल को जानें
छत्रपति शिवाजी महाराज को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा, ‘इस महीने की शुरुआत में ही छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक के 350 वर्ष पूरे हुए हैं। इस अवसर को एक बड़े पर्व के रूप में मनाया जा रहा है। इस दौरान महाराष्ट्र के रायगढ़ किले में इससे जुड़े भव्य कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। यह हम सबका कर्तव्य है कि इस अवसर पर हम छत्रपति शिवाजी महाराज के प्रबंध कौशल को जानें, उनसे सीखें। इससे हमारे भीतर, हमारी विरासत पर गर्व का बोध भी जगेगा, और भविष्य के लिए कर्तव्यों की प्रेरणा भी मिलेगी।’
जब नीयत साफ हो...
प्रधानमंत्री ने कहा कि जब नीयत साफ हो, प्रयासों में ईमानदारी हो, तो फिर कोई भी लक्ष्य, कठिन नहीं रहता। महिला जूनियर एशिया कप में मिली जीत और जूनियर एशिया कप (पुरुष) में मिली शानदार जीत का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हमारे खिलाड़ी जितना खेलेंगे, उतना ही खिलेंगे। उन्होंने कहा, ‘ऐसे कितने ही खेल और प्रतियोगिताएं हैं, जहाँ आज भारत, पहली बार, अपनी मौजूदगी दर्ज करवा रहा है। इंटरनेषनल आयोजनों में देश की इस सफलता के पीछे राष्ट्रीय स्तर पर हमारे खिलाड़ियों की कड़ी मेहनत होती है। आज, देश के अलग-अलग राज्यों में एक नए उत्साह के साथ खेलों के आयोजन होते हैं।
योग दिवस से जुड़ने की अपील
प्रधानमंत्री ने लोगों से इस बार के योग दिवस से जुड़ने का आग्रह किया और कहा कि योग को अपने जीवन में जरूर अपनाएं, इसे, अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। अगर अब भी आप योग से नहीं जुड़े हैं तो आने वाली 21 जून, इस संकल्प के लिए बहुत बेहतरीन मौका है। पीएम मोदी ने कहा कि योग में तो वैसे भी ज्यादा तामझाम की जरुरत ही नहीं होती है। देखिये, जब आप योग से जुड़ेंगे तो आपके जीवन में कितना बड़ा परिवर्तन आएगा।
आपातकाल को किया याद
आपातकाल का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘भारत लोकतंत्र की जननी है, मदर आॅफ डेमोक्रेसी है। हम, अपने लोकतांत्रिक आदर्शों को सर्वोपरि मानते हैं, अपने संविधान को सर्वोपरि मानते हैं, इसलिए, हम 25 जून को भी कभी भुला नहीं सकते। यह वही दिन है जब हमारे देश पर इमरजेंसी थोपी गई थी। यह भारत के इतिहास का काला दौर था। लाखों लोगों ने इमरजेंसी का पूरी ताकत से विरोध किया था। लोकतंत्र के समर्थकों पर उस दौरान इतना अत्याचार किया गया, इतनी यातनाएं दी गईं कि आज भी, मन, सिहर उठता है। इमरजेंसी के दौरान छपी पुस्तक में वर्णन किया गया है, कि कैसे, उस समय की सरकार, लोकतंत्र के रखवालों से क्रूरतम व्यवहार कर रही थी। मैं चाहूँगा कि, आज, जब हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं, तो, देश की आजादी को खतरे में डालने वाले ऐसे अपराधों का भी जरूर अवलोकन करें। इससे आज की युवा पीढ़ी को लोकतंत्र के मायने और उसकी अहमियत समझने में और ज्यादा आसानी होगी।’
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