लोन लेने वालों को आरबीआई का तोहफा, ईएमआई बाउंस हुई तो भी बैंक नहीं वसूल सकेंगे ब्याज

<p><em><strong>रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बैंकों और एबीएफसी को ईएमआई या किस्त बाउंस हो जाने पर उन पर फाइन लगाने की आजादी तो दी है, लेकिन फाइन पर ब्याज लगाने के नियम को खत्म कर दिया है। बैंकों को उचित दंडात्मक शुल्क लगाने की अनुमति दी है लेकिन ब्याज नहीं।</strong></em></p>

लोन लेने वालों को आरबीआई का तोहफा, ईएमआई बाउंस हुई तो भी बैंक नहीं वसूल सकेंगे ब्याज
19-08-2023 - 12:33 PM
21-04-2026 - 12:04 PM

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने करोड़ों कर्जधारकों को बड़ी राहत देते हुए नियमों में संषोधन किया है। आरबीआई ने बैंकों को और एबीएफसी को निर्देश दिया है कि अगर कोई कर्जदार वक्त पर ईएमआई नहीं दे पाता या चेक बाउंस हो जाता है तो उस पर फाइन लगाया जा सकता है, लेकिन इस फाइन पर ब्याज नहीं लगा सकते हैं। आरबीआई ने बैंकों की मनमानी पर रोक लगा दी है। बैंक ने कहा है कि बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों ने पीनल इंटरेस्ट को अपना रेवेन्यू बढ़ाने का जरिया बना लया था, जिसकी वजह से लोन लेने वालों को मुश्किल हो रही थी। अब आरबीआई ने इसके लिए रिवाइज्ड गाइडलाइन जारी की हैं, जिसके मुताबिक बैंक और एनबीएफसी कर्ज के ईएमआई बाउंस पर फाइन की लगा सकेंगे , लेकिन उस पर ब्याज नहीं।
क्या कहा आरबीआई ने
आरबीआई ने बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) की श्दंडात्मक ब्याजश् को अपना राजस्व बढ़ाने के माध्यम के रूप में इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति पर चिंता जताई है। केंद्रीय बैंक ने इस बारे में संशोधित नियम जारी किए हैं। नए नियमों के तहत कर्ज भुगतान में चूक के मामले में अब बैंक संबंधित ग्राहक पर सिर्फ ‘उचित’ दंडात्मक शुल्क ही लगा सकेंगे। 
दंडात्मक शुल्क उचित होना चाहिए 
इसके साथ ही रिजर्व बैंक ने स्पष्ट किया है कि दंडात्मक शुल्क उचित होना चाहिए। यह किसी कर्ज या उत्पाद श्रेणी में पक्षपातपूर्ण नहीं होना चाहिए। अधिसूचना में कहा गया है कि दंडात्मक शुल्क का कोई पूंजीकरण नहीं होगा। ऐसे शुल्कों पर अतिरिक्त ब्याज की गणना नहीं की जाएगी। हालांकि, केंद्रीय बैंक के ये निर्देश क्रेडिट कार्ड, बाह्य वाणिज्यिक कर्ज, व्यापार क्रेडिट आदि पर लागू नहीं होगी। केंद्रीय बैंक ने कहा, ‘दंडात्मक ब्याजध्शुल्क लगाने की मंशा कर्ज लेने वाले में ऋण को लेकर अनुशासन की भावना लाना होता है। इसे बैंकों द्वारा अपना राजस्व बढ़ाने के माध्यम के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।’

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।