तो अब.. भारतीय रिजर्व बैंक भी इसी माह के अंत तक बढ़ा सकता है रेपो दरें, हो सकते हैं आवासीय, वाहन और निजी ऋण महंगे
भारतीय रिजर्व बैंक पर ऋणों पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव बढ़ गया है और इसका कारण अमरीका के फेडरल बैंक द्वारा प्रमुख ब्याज दरों को बढ़ाना। अमरीका के केद्रीय बैंक ने बुधवार, 21 सितंबर को ब्याज दर में 0.75 फीसदी की बढ़ोतरी की घोषणा की है।
उल्लेखनीय है कि यूएस फेडरल रिजर्व बैंक ने लगातार तीसरी बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी की है और वह अपनी ब्याज दरों को बढ़ाकर 3-3.25 फीसदी के बीच ले आया है। इसके अलावा बैंक का यह भी कहना है कि आने वाली बैठकों में वह ब्याज दरों में और बड़ी बढ़ोतरी कर वर्ष 2023 तक 4.6 फीसदी के स्तर पर ला सकता है। ऐसा वह अमरीका में महंगाई पर नियंत्रण पाने के नाम पर कर रहा है। कुछ महीनों पहले अमेरिका में महंगाई 40 साल के उच्चतम स्तर 9.1 फीसदी पर पहुंच गयी थी।
अमरीका के फेडरल रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी किये जाने से भारतीय रिजर्व बैंक भी ऋणों पर ब्याज दरें बढ़ा सकता है। रिजर्व बैंक की मॉनिटरी पॉलिसी समिति की अगली बैठक 28 सितंबर से 30 सितंबर के बीच होने वाली है। माना जा रहा है कि इस बैठक में आरबीआई रेपो दरों में 0.25 से 0.35 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकता है। इसके परिणाम से व्यावसायिक बैंकों भी ऋण दरों बढ़ाने को बाध्य होंगे और आवासीय ऋण,वाहन ऋण और निजी ऋण सहित हर तरह के ऋणों पर ब्याज दरें बढ़ जाएंगी। अगस्त में खुदरा महंगाई दर 6.71 फीसदी से बढ़कर 7 फीसदी फीसदी तक पहुंच गई थी और आरबीआई ने रेपो रेट को आधा फीसदी बढ़ाकर 5.40 फीसदी कर दिया था।
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