Dahaad Review : सोनाक्षी की ‘दहाड़’ में दिखे राजस्थान के अनछुए पहलू
<p><strong>Dahaad Web Series Review : <em>सोनाक्षी सिन्हा की लेटेस्ट वेब सीरिज शुक्रवार, 12 मई 2023 को अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हो गई है। सीरीज में सोनाक्षी के साथ कई दिग्गज एक्टर्स हैं। आठ एपिसोड की यह सीरीज बर्लिन फिल्म फेस्टविल में प्रीमियर होने वाली पहली भारतीय सीरीज बन चुकी है।</em></strong></p>
रीमा कागती की यह सीरीज सब-इंस्पेक्टर अंजलि भाटी के किरदार के इर्द-गिर्द बुनी गई है। वह राजस्थान के मंडावा में लगातार हो रही हत्याओं की जांच कर रही है। इन हत्याओं में सबसे अनोखी बात यह है कि की कातिल इसे सार्वजनिक शौचालय में अंजाम दे रहा है। शुरुआत में ऐसा लगता है कि ये हत्या से अधिक आत्महत्या है। लेकिन एक के बाद एक मिल रही लाशें इस सीरियल कीलिंग का सबूत देती हैं। इतना ही नहीं, इस कातिल का एक खास पैटर्न भी है, जो इस बात की ओर इशारा करता है कि वो वह पहले भी हत्याएं कर चुका है। लेकिन सच्चाई क्या है? कातिल कौन है? वह ऐसा क्यों कर रहा है? पहले एपिसोड से ही कातिल और पुलिस के बीच चूहे-बिल्ली का खेल शुरू होता है, जो आठ एपिसोड तक दर्शकों को बांधे रखता है।
‘दहाड़’ वेब सीरीज रिव्यू
‘दहाड़’ की शुरुआत एक विचलित करने वाले सीन से होती है। एक सार्वजनिक शौचालय से शादी के जोड़े में सजी एक दुल्हन की लाश मिलती है। पहले-पहल यही लगता है कि मामला आत्महत्या का है। लेकिन जैसे-जैसे मंडावा और राजस्थान के पड़ोसी हिस्सों में लापता महिलाओं की संख्या बढ़ती जाती है, जांच अधिकारी-सब-इंस्पेक्टर अंजलि भाटी (सोनाक्षी सिन्हा), एसएचओ देवी प्रसाद सिंह (गुलशन देवैया), और इंस्पेक्टर कैलाश पारघी (सोहम शाह) का शक गहराने लगता है कि मामला कहीं बड़ा और सीरियल किलिंग का है। पुलिस की जांच आनंद सवणकर (विजय वर्मा) तक पहुंचती है। आनंद दिखने में एक बेहद ही सरल, सहज और आम इंसान है, जो लड़कियों के स्कूल में हिंदी साहित्य पढ़ाता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या वह इतना जघन्य अपराध करने की हिम्मत रखता है? और अगर वह हत्यारा नहीं है, तो फिर अपराधी कौन है?
कसी हुई है कहानी
रीमा कागती और जोया अख्तर ने इस सीरीज का निर्माण किया है। स्क्रीनप्ले दिलचस्प है और शो की इंटेंसिटी कम नहीं होती है। एक हत्यारे के दिमाग में क्या चल रहा है, वह बर्बरता की किस हद तक जा सकता है और हर बार खुद को बचाने के लिए क्या तिकड़म लगाता है, यह सब देखना मजेदार है। सीरीज के हर एिपसोड की लंबाई लगभग 50-55 मिनट है। इस पूरे ड्रामे के केंद्र में जातिगत भेदभाव मूल विषय है। पिछड़े वर्ग की अंजलि भाटी को उच्च वर्ग के घरों में घुसने की भी इजजात नहीं है। सीरीज में ऐसे कई सीन हैं, जो हमें यह अच्छे से एहसास करवाते हैं कि देश भले विश्व शक्ति होने का दंभ भर रहा हो, लेकिन भेदभाव अभी भी है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
जम रही है सोनाक्षी, विजय भी दमदार
यह क्राइम ड्रामा सीरीज एक के बाद एक लगातार हो रही घटनाओं, खुलासों और दमदार परफॉर्मेंस के कारण देखने में दिलचस्प लगती है। लीड रोल में सोनाक्षी सिन्हा की परफॉर्मेंस ओटीटी पर डेब्यू के लिहाज से बेहतरीन है। वह पूरी ईमानदारी से अपना किरदार निभाती हैं। मार्शल आर्ट की प्रैक्टिस करना, संदिग्ध की तलाश करना, इन सबमें वह जमती हैं। अन्य अधिकारियों के रोल में गुलशन देवैया और सोहम शाह ने भी उम्दा काम किया है। विजय वर्मा जब भी स्क्रीन पर आते हैं, छा जाते हैं। किरदार की दुष्ट आत्मा और उसके कुटिल लहजे को उन्होंने अपने एक्सप्रेशंस से अच्छे से उभारा है। साथ ही साथ एक मिडिल क्लास शादीशुदा इंसान के रूप में भी वह ध्यान खींचते हैं।
दिखे राजस्थान के अनोखे रंग
‘दहाड़’ की शूटिंग राजस्थान के अलग-अलग हिस्सों में हुई है। तनय सतम ने अपनी सिनेमेटोग्राफी से गांव-देहात को बड़ी खूबसूरती से दिखाया है। यह सब इस सीरीज को असल जिंदगी के करीब लाता है। इसके साथ ही पूरी कास्ट का राजस्थानी बोली का डायलॉग डिलिवरी में इस्तेमाल भी इसे प्लॉट के और करीब लाता है। गौरव रैना और तराना मारवाह का म्यूजिक कहानी और प्लॉट से बखूबी मेल खाता है। हालांकि, एडिटिंग टेबल पर अगर करीब 1 घंटे के हर एपिसोड को और चुस्ती से संपादित किया जाता, तो यह शो और दिलचस्प बन सकता था।
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