चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल
<p><em><strong>मौजूदा प्रक्रिया में सरकार अपनी पसंद के व्यक्ति को चुनाव आयुक्त नियुक्त कर सकती है जबकि ऐसे शख्स की नियुक्ति की जानी चाहिए जो बिना किसी दबाव या प्रभाव के स्वतंत्र फैसले ले सके। </strong></em></p>
सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 324 (2) का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों के चयन और नियुक्ति के लिए कानून बनाने की बात कही गई है लेकिन पिछले 7 दशकों में कुछ नहीं किया गया। शीर्ष अदालत ने मुख्य चुनाव आयुक्तों के छोटे होते कार्यकाल को लेकर भी सवाल किए।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाए। पांच जजों की संविधान पीठ ने केंद्र सरकार पर कुछ बेहद तीखे सवाल दागे। मसलन, 2004 के बाद से मुख्य चुनाव आयुक्तों के कार्यकाल क्यों कम हो रहे हैं? निष्पक्ष और पारदर्शी नियुक्ति प्रक्रिया के लिए कानून क्यों नहीं बना? मौजूदा प्रक्रिया में सरकार अपनी पसंद के व्यक्ति को चुनाव आयुक्त नियुक्त कर सकती है जबकि ऐसे शख्स की नियुक्ति की जानी चाहिए जो बिना किसी दबाव या प्रभाव के स्वतंत्र फैसले ले सके।
नियुक्ति कानून पर सब मौन क्यों
इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान में मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त के चयन और नियुक्ति को लेकर कानून की बात कही गई है लेकिन 7 दशक बाद भी कोई कानून नहीं बना। यह संविधान की ‘चुप्पी’ के शोषण की तरह है।
क्या है चुनाव आयोग
चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है जो देश में चुनावों को कराती है। इसकी स्थापना 25 जनवरी 1950 को हुआ था। संविधान के मुताबिक, चुनाव आयोग को स्वायत्तता मिली हुई है और यह स्वतंत्र रूप से काम करता है।
चुनाव आयोग में कौन-कौन
शुरुआत में चुनाव आयोग में सिर्फ एक ही सदस्य होता था, मुख्य चुनाव आयुक्त। 16 अक्टूबर 1989 से चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त के अलावा 2 चुनाव आयुक्त की व्यवस्था की गई। उसी दिन वोटर के लिए न्यूनतम उम्र भी 21 साल से घटाकर 18 साल कर दी गई। जनवरी 1990 में एक सदस्यीय चुनाव आयोग को बहाल कर दिया गया लेकिन अक्टूबर 1993 में राष्ट्रपति ने दो और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति कर फिर से इसे तीन सदस्यीय स्वरूप दिया। तब से यही व्यवस्था चली आ रही है।
कौन करता है नियुक्ति
मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति करते है। ये आईएएस रैंक के अधिकारी होते हैं। इनका कार्यकाल 6 साल या 65 साल की उम्र (दोनों में से जो भी पहले हो) तक होता है। उनका दर्जा सुप्रीम कोर्ट के जजों के समकक्ष होता है और उन्हें भी वही वेतन और भत्ते मिलते हैं जो सुप्रीम कोर्ट के जजों को मिलते हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त चुनाव आयोग का प्रमुख होता है लेकिन उसके अधिकार भी बाकी चुनाव आयुक्तों के बराबर ही होते हैं। आयोग के फैसले सदस्यों के बहुमत या सर्वसम्मति के आधार पर होते हैं।
नियुक्ति प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट ने क्यों उठाए सवाल
मौजूदा व्यवस्था के तहत सरकार अपनी पसंद के नौकरशाहों को मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों के तौर पर नियुक्त करती है। जस्टिस केएम जोसेफ, अजय रस्तोगी, अनिरुद्ध बोस, ऋषिकेश रॉय और जस्टिस सीटी रविकुमार की 5 जजों वाली संविधान पीठ चुनाव आयोग के सदस्यों की नियुक्ति प्रक्रिया में सुधार की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान केंद्र से कड़े सवाल किए।
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