‘मुल्ला जनरल’ को पाक सेना की कमान यानी भारत के लिए अतिरिक्त सावधान रहने का समय..!

<p><em><strong>पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड लेफ्टिनेंट जनरल असीम मुनीर को देश का नया आर्मी चीफ बनाया है।</strong></em></p>

‘मुल्ला जनरल’ को पाक सेना की कमान यानी भारत के लिए अतिरिक्त सावधान रहने का समय..!
26-11-2022 - 09:21 AM
21-04-2026 - 12:04 PM

पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने वर्तमान सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा के साथ मिलकर लेफ्टिनेंट जनरल असीम मुनीर को नया आर्मी चीफ नियुक्त किया है। पाकिस्तान में संभवतः पहली बार हुआ है, जब एक ऐसा शख्स देश के सबसे शक्तिशाली पद की कुर्सी पर बैठा है जो ‘मुल्ला जनरल’ के नाम से जाना जाता है। विशेषज्ञों ने भारत को पाकिस्तानी सेना में इस्लामिक कट्टरपंथ से सतर्क रहने की सलाह दी है।
कंठस्थ है पूरी कुरान
दरअसल, असीम मुनीर ने कुरान को पूरी तरह से याद कर रखा है और यही वजह है कि उन्हें मुल्ला जनरल कहा जाता है। पाकिस्तान मीडिया के मुताबिक असीम मुनीर सऊदी अरब में लेफ्टिनेंट कर्नल के पद पर तैनात रहने के दौरान कुरान को पूरी तरह से याद कर लिया था। यही वजह है कि उन्हें हाफिज-ए-कुरान कहा जाता है। मुनीर को धार्मिक रूप से बहुत कट्टर माना जाता है। पाकिस्तान के मामलों पर नजर रखने वाले भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के पूर्व सदस्य का कहना है कि ऐसा पहली बार हुआ है जब पाकिस्तान में कोई ऐसा आर्मी चीफ बना है जिसे कुरान पूरी तरह से याद  है और  इसलिए उन्हें मुल्ला जनरल कहा जा सकता है।
सेना में बढ़ेगी इस्लामिक कट्टरता
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में पहले भी ऐसे सैन्य अधिकारी हुए हैं जो हाफिज-ए-कुरान रह चुके हैं लेकिन आर्मी चीफ पहली बार हुआ है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में मुस्लिम कट्टरपंथियों का दबदबा रहा है। इससे पहले पाकिस्तानी सेना के जनरल जहीरूल इस्लाम ने कई कट्टरपंथी बन चुके सैनिकों की मदद से बेनजीर भुट्टो की सरकार का तख्तापलट करने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा कि हिज्ब-ए-कुरान जनरल असीम मुनीर भले ही कट्टरपंथियों को बढ़ावा न दें लेकिन वह ऐसा माहौल बना सकते हैं जहां सेना के अंदर इस्लामिक कट्टरता को बढ़ावा मिल सकता है। रामनाथन ने कहा कि ऐसे में भारत को अतिरिक्त सावधान रहने की जरूरत है।
अल्लाह के लिए लड़ती है पाक सेना
पाकिस्तान की सेना खुद को इस्लाम की सेना मानती है। पाकिस्तान की सेना के बारे में कहा जाता है कि वह अल्लाह के लिए लड़ती है न कि देश के लिए। पाकिस्तान की सेना ने अपनी वेबसाइट पर अपना यही मोटो लिखा है। इसमें अल्लाह के लिए जंग लड़ने की बात कही गई है।
जनरल जिया ने किया था सेना का इस्लामीकरण
पाकिस्तान इस्लामिक अतिवाद और आतंकवाद की वजह से अस्थिरता के दौर में गुजर रहा है। दरअसल, जनरल जिया उल हक की नीतियों से पाकिस्तानी सेना में ऐसे अधिकारियों और सैनिकों की नस्ल आ गई, जो सेना के अंदर इस्लामिक अजेंडे को आगे बढ़ाना चाहते थे। पाकिस्तान की सेना के बैरकों में न केवल धर्मांतरण बल्कि देवबंदी और वहाबी मत से जुड़ी गतिविधियों की अनुमति दी गई थी। यही नहीं पाकिस्तानी सेना के सैनिकों को भी तबलीगी जमात की गतिविधियों में शामिल होने की अनुमति दी गई। 
मुनीर से यह है सबसे बड़ा खतरा
इससे पाकिस्तानी सेना में ऐसे रणनीतिकारों की एक नई पौध आ गई, जो जेहादी विचारधारा और सैन्य योजनाओं से लैस थे। पाकिस्तानी सैनिकों को कुरान पर आधारित जंग की ट्रेनिंग दी गई। उन्हें दार-उल- इस्लाम और दार उल हर्ब के बारे में बताया गया। इस तरह जनरल जिया ने पाकिस्तानी सेना को पूरी तरह से कट्टरपंथी बना दिया। इसी का खतरा अब जनरल मुनीर के आर्मी चीफ बनने पर जताया जा रहा है।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।