इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाइमा खातून की एएमयू कुलपति नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शनिवार को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) की कुलपति के रूप में डॉ. नाइमा खातून की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया..
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शनिवार को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) की कुलपति के रूप में डॉ. नाइमा खातून की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया।
याचिका प्रो. मुजाहिद बेग द्वारा दायर की गई थी, जिसमें उन्होंने नियुक्ति प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाया और कहा कि प्रक्रिया एक खास उम्मीदवार को लाभ पहुंचाने के लिए की गई।
याचिका में क्या आरोप थे?
- प्रो. बेग ने दावा किया कि नियुक्ति प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन किया गया।
- उन्होंने कहा कि डॉ. नाइमा खातून के पति प्रो. मोहम्मद गुलरेज़, जो नियुक्ति से पहले कार्यवाहक कुलपति थे, चयन प्रक्रिया की अध्यक्षता कर रहे थे जबकि उनकी पत्नी उम्मीदवार थीं।
- इससे हितों का टकराव (conflict of interest) उत्पन्न हुआ और निष्पक्षता पर सवाल उठे।
अदालत का फैसला
- न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्र और डोनाडी रमेश की पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद 9 अप्रैल को फैसला सुरक्षित रखा था।
- शनिवार को पीठ ने याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि नियुक्ति प्रक्रिया में कोई कानूनी खामी नहीं पाई गई।
- कोर्ट ने यह भी माना कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कोई पक्षपात या नियमों का उल्लंघन साबित नहीं हुआ।
नाइमा खातून कौन हैं?
- डॉ. नाइमा खातून AMU की पहली महिला कुलपति बनी हैं।
- इससे पहले वे विश्वविद्यालय के महिला कॉलेज की प्राचार्या रही हैं।
- उनकी नियुक्ति को शिक्षा जगत में महिला सशक्तिकरण के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।
What's Your Reaction?