फरवरी में AI सम्मेलन की मेजबानी करेगा भारत, चीन को भी भेजा औपचारिक निमंत्रण
भारत ने फरवरी में होने वाले अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इम्पैक्ट समिट में शामिल होने के लिए चीन को औपचारिक निमंत्रण भेजा है। यह कदम दोनों देशों के बीच रिश्तों में आ रही नरमी को रेखांकित करता है क्योंकि भारत और चीन दोनों ही AI के क्षेत्र में घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर..
नयी दिल्ली। भारत ने फरवरी में होने वाले अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इम्पैक्ट समिट में शामिल होने के लिए चीन को औपचारिक निमंत्रण भेजा है। यह कदम दोनों देशों के बीच रिश्तों में आ रही नरमी को रेखांकित करता है क्योंकि भारत और चीन दोनों ही AI के क्षेत्र में घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं।
सोमवार को एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान आईटी सचिव एस कृष्णन ने पुष्टि की कि नई दिल्ली ने बीजिंग को औपचारिक आमंत्रण भेज दिया है। भारत इस शिखर सम्मेलन का चौथा संस्करण आयोजित कर रहा है, इससे पहले यह सम्मेलन ब्रिटेन, दक्षिण कोरिया और फ्रांस में हो चुका है।
AI समिट की शुरुआत वर्ष 2023 में ब्रिटेन से हुई थी। यह कोई औपचारिक अंतरराष्ट्रीय समूह नहीं है और इसमें शामिल होने के लिए देशों को निमंत्रण मेज़बान देश की ओर से दिया जाता है। जब ब्रिटेन ने पहले सम्मेलन की मेजबानी की थी, तब चीन को आमंत्रित किए जाने को लेकर उसके करीबी सहयोगियों और सांसदों की ओर से विरोध हुआ था, लेकिन इसके बावजूद ब्रिटिश सरकार ने चीन को निमंत्रण दिया था। इसके बाद के दोनों सम्मेलनों में भी चीन की भागीदारी रही।
भारत इंडिया–AI इम्पैक्ट समिट 2026 का आयोजन 15 से 20 फरवरी के बीच करेगा। यह पहली बार है जब यह मंच ग्लोबल साउथ में आयोजित हो रहा है। इस सम्मेलन का उद्देश्य त्वरित और बाध्यकारी नियम बनाने के बजाय AI के दीर्घकालिक शासन (गवर्नेंस) के लिए ठोस और व्यावहारिक सिफारिशें तैयार करना है।
आईटी सचिव एस कृष्णन ने बताया कि सम्मेलन में 15 से 20 देशों के राष्ट्राध्यक्ष या सरकार प्रमुख, साथ ही AI और टेक्नोलॉजी क्षेत्र की कई प्रमुख वैश्विक हस्तियां शामिल होने की संभावना है।
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक्सपो का उद्घाटन करेंगे। वह शाम को एक डिनर की मेजबानी भी कर सकते हैं और सीईओ राउंडटेबल को संबोधित करने की भी संभावना है।”
कृष्णन के अनुसार, बिल गेट्स जैसे वैश्विक नेता अपनी उपस्थिति की पुष्टि कर चुके हैं। इसके अलावा डेमिस हासाबिस (सीईओ, डीपमाइंड टेक्नोलॉजीज), डारियो अमोडेई (सीईओ, एंथ्रोपिक), शांतनु नारायण (सीईओ, एडोबी), मार्क बेनिओफ (सीईओ, सेल्सफोर्स), क्रिस्टियानो एमोन (सीईओ, क्वालकॉम) और राज सुब्रमण्यम (सीईओ, फेडएक्स) सहित कई दिग्गजों ने भी भागीदारी की पुष्टि की है।
उन्होंने बताया, “करीब 140 देशों को निमंत्रण भेजे गए हैं और अब तक 136 देशों से लगभग 15,500 पंजीकरण प्राप्त हुए हैं। इनमें से 76 देश ग्लोबल साउथ से हैं।”
भारत-चीन संबंधों में नरमी के संकेत
भारत द्वारा चीन को दिया गया यह निमंत्रण दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की दिशा में एक और कदम माना जा रहा है। इससे पहले इस वर्ष पांच साल से अधिक के अंतराल के बाद भारत और चीन के बीच सीधी उड़ानें फिर से शुरू हुई थीं।
इसी तरह, पहले चीन ने अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ के बाद रेयर अर्थ मिनरल्स को लेकर प्रतिबंध लगाते हुए भारत के ऑटोमोबाइल निर्माताओं को पुर्जे सप्लाई करने वाली कंपनियों के आवेदनों को रोक दिया था। अब चीन ने इनमें से कुछ आवेदनों को मंजूरी देना शुरू कर दिया है।
निर्यात में उछाल, चीन भी बना बड़ा बाजार
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा इस महीने जारी आंकड़ों के अनुसार, नवंबर में भारत का वस्तु निर्यात 19 प्रतिशत बढ़ा। कमजोर रुपये और चीन, यूरोप व अमेरिका सहित प्रमुख बाजारों में मजबूत मांग के चलते व्यापार घाटा घटकर 24 अरब डॉलर पर आ गया, जो पांच महीनों का निचला स्तर है।
आंकड़ों से निर्यात में विविधीकरण के मजबूत संकेत मिलते हैं। इसके अलावा चीन और जापान के बीच हालिया तनाव का फायदा भी भारतीय निर्यातकों को मिला है। बीजिंग द्वारा टोक्यो से आयात पर प्रतिबंध कड़े करने के बाद चीन को भारत का निर्यात, खासकर समुद्री खाद्य उत्पादों का, तेजी से बढ़ा है।
पिछले महीने भारत का चीन को निर्यात 90 प्रतिशत और हांगकांग को निर्यात 35 प्रतिशत तक बढ़ गया, जो भारत-चीन आर्थिक संबंधों में नए अवसरों की ओर इशारा करता है।
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