‘आदतन गौ-तस्कर आरोपी’ की जमानत सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की — ‘भजनलाल सरकार की बड़ी कानूनी जीत’
सुप्रीम कोर्ट ने अपने ही पूर्व आदेश को वापस लेते हुए राजस्थान के करौली जिले में गौ-तस्करी के एक मामले में आरोपी नाज़िम खान की जमानत रद्द कर दी ..
नयी दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अपने ही पूर्व आदेश को वापस लेते हुए राजस्थान के करौली जिले में गौ-तस्करी के एक मामले में आरोपी नाज़िम खान की जमानत रद्द कर दी है। नाज़िम खान को ‘आदतन गौ-तस्कर’ बताया गया है। यह जानकारी राजस्थान सरकार के अपर महाधिवक्ता (AAG) शिव मंगल शर्मा ने दी।
शर्मा ने इसे राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार के लिए "एक दुर्लभ हस्तक्षेप और बड़ी कानूनी जीत" बताया।
यह आदेश सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ ने राजस्थान सरकार द्वारा दायर एक आवेदन पर सुनवाई करते हुए दिया। यह अर्जी राज्य की ओर से एएजी शर्मा ने दाखिल की थी, जिसमें पहले दिए गए जमानत आदेश को रद्द करने की मांग की गई थी। यह जमानत आदेश उस समय पारित हुआ था जब राज्य की ओर से कोई उपस्थिति नहीं थी।
मामला फरवरी 2021 का है, जब राजस्थान के करौली जिले में नादौती थाना क्षेत्र के महावीरजी तिराहे पर एक कंटेनर ट्रक को रोके जाने पर आरोपी फरार हो गया था। एफआईआर और केस डायरी के अनुसार, पुलिस को सूचना मिली थी कि ट्रक में गोवंश की तस्करी हो रही है। जब पुलिस ने ट्रक को रोकने की कोशिश की, तो चालक ने ट्रक की रफ्तार बढ़ा दी। पीछा करने के बाद ट्रक को रोका गया, लेकिन तीन में से एक व्यक्ति – नाज़िम खान, जो ट्रक का मालिक था – चलते ट्रक से कूदकर फरार हो गया।
ट्रक के अंदर दो दर्जन से अधिक गायें, एक मृत गाय और कुछ बछड़े मिले, जिन्हें अमानवीय और ठूंस-ठूंस कर बिना किसी वैध कागजात या परमिट के भरा गया था। सह-आरोपी कासिम और बिलाल को मौके पर गिरफ्तार कर लिया गया था और ट्रक ज़ब्त कर लिया गया। पशु चिकित्सकीय जांच के बाद सभी जानवरों को एक पंजीकृत गौशाला में भेजा गया।
शर्मा ने बताया कि नाज़िम खान तीन साल से फरार था, और उसे अप्रैल 2023 में उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिला जेल से गिरफ्तार किया गया, जहां वह एक अन्य गौ-तस्करी मामले में बंद था।
राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बताया कि नाज़िम खान एक सीरियल अपराधी है, जिसके खिलाफ उत्तर प्रदेश में कम से कम 9 एफआईआर दर्ज हैं, जिनमें गैंगस्टर एक्ट, आर्म्स एक्ट, गोहत्या कानून और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। वह कम से कम पांच मामलों में फरार रहा है, और कई अदालतों ने गिरफ्तारी के गैर-जमानती वारंट भी जारी किए हैं।
पिछले साल अक्टूबर में, जब सुप्रीम कोर्ट ने उसे जमानत दी थी, तब राज्य सरकार की ओर से कोई प्रतिनिधित्व नहीं था, क्योंकि नोटिस केवल स्थानीय थाने को भेजा गया था, गृह विभाग को नहीं। इसके बाद कांग्रेस पार्टी ने इसे लेकर भाजपा सरकार पर राजनीति करने का आरोप लगाया था और कहा था कि गायों की रक्षा के नाम पर भाजपा सिर्फ राजनीति करती है। इस चूक के चलते नादौती थाने के एसएचओ को निलंबित कर दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि "ऐसे अपराधियों को, जो बार-बार कानून की अवहेलना करते हैं और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा हैं, उन्हें इस तरह की राहत नहीं दी जा सकती।" अदालत ने आरोपी से उसके खिलाफ लंबित मामलों का पूरा ब्यौरा शपथपत्र के रूप में मांगा और स्पष्ट किया कि जमानत "महत्वपूर्ण तथ्यों के अभाव में दी गई थी।"
यह फैसला राजस्थान सरकार के लिए कानून व्यवस्था और गो-संरक्षण के संदर्भ में एक अहम राजनीतिक और कानूनी जीत मानी जा रही है।
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