कनाडा में एनआरआई कारोबारी दर्शन सिंह साहसी की गोली मारकर हत्या, लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने ली जिम्मेदारी
कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया में मंगलवार को 68 वर्षीय एनआरआई व्यवसायी दर्शन सिंह साहसी की उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस का कहना है कि यह एक सुनियोजित हमला (Targeted Attack) था। इस हत्या की जिम्मेदारी लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़े कनाडा स्थित गैंगस्टर गोल्डी ढिल्लों ने सोशल मीडिया पर पोस्ट के माध्यम से..
नयी दिल्ली। कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया में मंगलवार को 68 वर्षीय एनआरआई व्यवसायी दर्शन सिंह साहसी की उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस का कहना है कि यह एक सुनियोजित हमला (Targeted Attack) था। इस हत्या की जिम्मेदारी लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़े कनाडा स्थित गैंगस्टर गोल्डी ढिल्लों ने सोशल मीडिया पर पोस्ट के माध्यम से ली है।
जानकारी के अनुसार, भारतीय मूल के उद्योगपति दर्शन सिंह साहसी की एबॉट्सफोर्ड (Abbotsford) स्थित उनके घर के बाहर हत्या की गई। हत्यारों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। यह घटना मंगलवार सुबह लगभग 9 बजे की है।
एबॉट्सफोर्ड पुलिस ने अपने बयान में कहा, “27 अक्टूबर 2025 की सुबह करीब 9:22 बजे एबॉट्सफोर्ड पुलिस को रिजव्यू ड्राइव के 31300 ब्लॉक में गोलीबारी की सूचना मिली। मौके पर पहुंचकर पुलिस ने इलाके को घेर लिया और पाया कि गोलीबारी एक खड़ी गाड़ी में हुई थी। गाड़ी के अंदर एक 68 वर्षीय व्यक्ति गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिला। प्राथमिक उपचार और आपात चिकित्सा प्रयासों के बावजूद उसकी मौके पर ही मौत हो गई। अब तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है।”
कौन थे दर्शन सिंह साहसी?
दर्शन सिंह साहसी मूल रूप से पंजाब के लुधियाना जिले के दोराहा के पास स्थित राजगढ़ गांव के रहने वाले थे। वह पहले ईंट भट्ठा मालिक थे। साल 1991 में वे कनाडा के वैंकूवर चले गए, जहां उन्होंने धीरे-धीरे अपने व्यवसाय को वैश्विक स्तर पर स्थापित किया।
वह कैनम इंटरनेशनल (Canam International) के प्रमुख थे जो दुनिया की प्रमुख कपड़ा पुनर्चक्रण (Clothing Recycling) कंपनियों में से एक मानी जाती है।
कनाडा में बसने से पहले उन्होंने कांडला (गुजरात) में एक प्लांट और पानीपत (हरियाणा) में एक रीसाइक्लिंग यूनिट भी चलाई थी।
साहसी न केवल उद्योगपति थे बल्कि समाजसेवी और पंजाबी भाषा के प्रबल समर्थक भी थे। वे 2012 से लुधियाना की पंजाबी साहित्य अकादमी (Punjabi Sahit Akademi) के संरक्षक के रूप में जुड़े हुए थे और पंजाबी भाषा व संस्कृति के प्रचार-प्रसार में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनकी हत्या से प्रवासी भारतीय समुदाय और पंजाबी समाज में गहरा शोक और आक्रोश व्याप्त है।
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