पाकिस्तान में खूनी सियासत..! प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति तक हो चुके हैं शिकार
<p><em><strong>यहां सत्ता के शीर्ष पर पहुंचने वाले हमेशा किसी और के निशाने पर रहे। गोली मारने से लेकर फांसी देने तक की साजिशें होती रहीं। यहां तक कि आत्मघाती हमले भी किए गए।</strong></em></p>
इमरान खान पर हुए जानलेवा हमले ने पाकिस्तानी सियासत के ‘खूनी इतिहास’ की याद फिर से ताजा कर दी है। 1947 में पाकिस्तान बनने के बाद से ही सियासत में खूनी खेल चलता रहा है। यहां सत्ता के शीर्ष पर पहुंचने वाले हमेशा किसी और के निशाने पर रहे। गोली मारने से लेकर फांसी देने तक की साजिशें होती रहीं। यहां तक कि आत्मघाती हमले भी किए गए।
पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली खान की हत्या
पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली खान की 16 अक्टूबर 1951 में हत्या कर दी गई थी। रावलपिंडी के कंपनी बाग में उन्हें गोली मार दी गई थी। वह मुस्लिम लीग की जनसभा के दौरान मंच पर बैठे थे। खान की मौत का रहस्य अब भी रहस्य ही है। जिन्ना के करीबी लियाकत अली खान पाकिस्तान में कट्टरपंथ के पांव नहीं जमने देना चाहते थे।
प्रधानमंत्री को चढ़ा दिया फांसी पर
जुल्फिकार अली भुट्टो पाकिस्तान में काफी लोकप्रिय नेता था। हालांकि जदनरल जिया-उल-हक ने तानाशाही शासन के दौरान उन्हें फांसी पर चढ़वा दिया था। कानून के जानकार इसे न्यायिक हत्या बताते हैं। जिया 1978 से 1988 तक पाकिस्तान का राष्ट्रपति और सेना प्रमुख था। उसने जुल्फिकार से सत्ता छीन ली थी। जुल्फिकार पहले ऐसे प्रधानमंत्री थे जिन्हें जनता ने चुना था।
जिया-उल-हक की भी हादसे में मौत
भुट्टो की फांसी के 9 साल बाद 1988 में जिया उल हक की भी संदिग्ध परिस्थितियों में एक विमान हादसे में मौत हो गई थी। यह भी कहा जाता था कि पूरी योजना के तहत विमान हादसा करवाया गया था। मौत के समय वह चीफ मार्शल लॉ एडमिनिस्ट्रेटर और आर्मी चीफ था।
बेनजीर भुट्टो की हत्या
पाकिस्तान बनने के बाद से ही जो खूनी खेल शुरू हुआ था वह भला थमने वाला कहां था। लियाकत गार्डन में जहां लियाकत अली खान की हत्या हुई थी, वहीं पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो को भी निशाना बनाया गया। 27 दिसंबर 2007 को गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई। वह जुल्फिकार अली भुट्टो की बेटी थीं।
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