एएसआई ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय को बताया कि ज्ञानवापी परिसर में शिवलिंग को हानि पहुंचाये बिना भी हो सकता है साइंटिफिक सर्वे
<p><em><strong>आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय को बताया है कि वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर में मिले शिवलिंग को हानि पहुंचाये बिना भी उसका साइंटिफिक सर्वे करवाया जा सकता है</strong></em></p>
एएसआई ने अदालत को बताया कि कोई चीज कितनी पुरानी है, इसका पता लगाने के लिए कार्बन डेटिंग के अलावा भी साइंटिफिक सर्वे की नयी तकनीक हैं। इलाहाबाद उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति जेजे मुनीर ने लक्ष्मी देवी व तीन अन्य की पुनरीक्षण याचिका पर सोमवार, 21 नवंबर को सुनवाई करते हुए एएसआई को 30 नवंबर तक स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही प्रमुख सचिव, धर्माथ कार्य से भी इस संबंध में हलफनामा मांगा है।
अब पुनरीक्षण याचिका पर 30 नवंबर को सुनवाई की जाएगी। उल्लेखनीय है कि वाराणसी के जिला न्यायाधीश के आदेश को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में पुनरीक्षण याचिका दायर की गई है। वाराणसी की अदालत ने शिवलिंग की कार्बन डेटिंग और वैज्ञानिक ढंग से काल निर्धारण की मांग अस्वीकार कर दी थी। न्यायमूर्ति जेजे मुनीर ने लक्ष्मी देवी और अन्य द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिका पर यह आदेश पारित किया क्योंकि सभी पक्ष सोमवार को अदालत में पेश नहीं हुए।
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