किसी कर्म में आपकी आस्था नहीं है तो इसका यह अर्थ बिल्कुल नहीं वह कर्म ही अनुचित है
<p><strong><em>आस्थाओं से जुड़े हमारे कर्म कई बार वैज्ञानिक तर्कों की कसौटी कसे जाते हैं। ऐसे में प्रश्न उठता है कि आखिर वैज्ञानिक तर्कों की कसौटी जरूरी क्यों है..</em></strong><strong><em>? और विज्ञान के पास भी तो सभी प्रश्नों के उत्तर नहीं हैं तो क्या विज्ञान को भी गलत ही ठहरा दिया जाये..? ऐसा करना भी तो अनुचित ही होगा। आस्थाओं के जुड़े प्रश्नों को लेकर बहुधा हमें अज्ञात लेखकों के आलेख प्राप्त होते हैं और ये आलेख काफी लोकप्रिय भी होते हैं..ऐसे ही आलेखों में से एक आलेख यहां प्रस्तुत है.. </em></strong></p>
एक पंडितजी को नदी में तर्पण करते देख एक फकीर अपनी बाल्टी से पानी गिराकर जाप करने लगा, "मेरी प्यासी गाय को पानी मिले।" पंडितजी ने पूछा कि ऐसा क्यों करते हो.., तो उस फकीर ने कहा कि जब आपके चढ़ाये जल और भोग आपके पुरखों को मिल जाते हैं तो मेरी गाय को भी यहीं से पानी भी मिल जाएगा। इस पर पंडितजी बहुत लज्जित हुए।
यह मनगढंत कहानी सुनाकर एक मित्र जोर से ठठाकर हंसने लगे और मुझसे बोले कि "सब पाखण्ड है और कुछ लोगों की जीविका इससे चलती है, इसीलिए उन्होंने यह पाखण्ड रचा है..!" शायद, मैं कुछ ज्यादा ही सहिष्णु हूं इसीलिए लोग मुझसे ऐसी बकवास करने से पहले ज्यादा सोचते नहीं है क्योंकि पहले मैं सामने वाली की पूरी बात सुन लेता हूं, उसके बाद ही उसे जबाब देता हूँ। खैर.., मैने तत्काल कुछ उत्तर नहीं दिया। मैंने बस, सामने मेज पर से 'केलकुलेटर' उठाकर एक नंबर डायल किया और अपने कान से लगा लिया। बात नहीं होने पर मैंने, उन मित्र से शिकायत की।
इस पर मेरे वो मित्र नाराज होकर उल्टे भड़क गए, और बोले, " ये क्या मज़ाक है ? 'कैलकुलेटर' से मोबाइल का काम कैसे हो सकेगा..?" तब मैंने कहा, तुमने सही बिल्कुल सही कहा। वही तो मैं भी कह रहा हूँ कि स्थूल शरीर छोड़ चुके लोगों के लिए बनी व्यवस्था जीवित प्राणियों पर कैसे काम करेगी ?
इस पर मित्र अपनी झेंप मिटाते हुए कहने लगे, "ये सब पाखण्ड है , अगर ये सच है तो, इसे सिद्ध करके दिखाइए" इस पर मैने कहा, ये सब छोड़िए और, ये बताइए कि न्युक्लियर पर न्युट्रॉन के बम्बारमेण्ट करने से क्या ऊर्जा निकलती है ? वो बोले, " बिल्कुल ! इट्स कॉल्ड एटॉमिक एनर्जी।" फिर, मैने उन्हें एक चॉक और पेपरवेट देकर कहा, अब आपके हाथ में बहुत सारे न्युक्लियर्स भी हैं और न्युट्रॉन्स भी...!
अब आप इसमें से एनर्जी निकाल के दिखाइए..! मित्र समझ गए और बोले, "दोस्त, एक काम याद आ गया है बाद में बात करते हैं.. " कहने का मतलब है कि यदि हम किसी विषय/तथ्य को प्रत्यक्षतः सिद्ध नहीं कर सकते तो इसका अर्थ है कि हमारे पास समुचित ज्ञान, संसाधन व अनुकूल परिस्थितियां नहीं है लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल भी नहीं है कि वह तथ्य ही गलत है क्योंकि, सिद्धांत रूप से तो हवा में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन दोनों मौजूद है, फिर, साधारण रूप में हवा से ही पानी क्यों नहीं बना लेते ?
अब आप हवा से पानी नहीं बना रहे हैं तो इसका मतलब ये थोड़े ना घोषित कर दोगे कि हवा में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन ही नहीं है। इसी तरह हमारे द्वारा श्रद्धा से किए गए सभी कर्म दान आदि भी आध्यात्मिक ऊर्जा के रूप में हमारे पितरों तक अवश्य पहुँचते हैं इसीलिए व्यर्थ के कुतर्को मे फंसकर अपने धर्म व संस्कार के प्रति कुण्ठा न पालें.!
लेखकः- अज्ञात
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