Wrestlers Protest : भारतीय पहलवान फिर दिल्ली में जंतर-मंतर पर धरने की राह पर, अदालत भी जाने की धमकी..जानिये क्या है पूरा मामला
<p><em>देश के पहलवान नाराज हैं और एक बार फिर नयी दिल्ली में जंतर-मंतर पर धरना दे रहे हैं। भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण और कोच पर यौन शोषण के आरोप को लेकर बनी जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट भी तैयार कर ली लेकिन उस बारे धरने में शामिल हुए पहलवानों को नहीं बताया गया। इससे वे निराश होकर और अब फिर से पहलवान जंतर-मंतर पर पहुंच गए।</em></p>
उल्लेखनीय है कि इसी साल जनवरी में विनेश फोगाट, बजरंग पूनिया और साक्षी मलिक जैसे देश के दिग्गज पहलवानों के नेतृत्व में कुछ पहलवान दिल्ली में जंतर-मंतर पर धरने पर भी बैठे थे। उनका यह प्रदर्शन तीन दिनों तक चला था। पहलवानों ने खेल मंत्री अनुराग ठाकुर के साथ बातचीत के बाद धरने को समाप्त किया था। उस समय बृजभूषण शरण सिंह को कुश्ती संघ के अध्यक्ष पद से अस्थायी रूप से हटा दिया गया और उनके ऊपर लगे आरोपों की जांच के लिए समिति बना दी गई थी।
वादाखिलाफी का आरोप
इस बार रविवार 23 अप्रेल को धरने पर बैठने आए पहलवानों ने खेल मंत्रालय पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने उनके साथ धोखा किया है। एक महीने में कार्रवाई का भरोसा दिया गया था लेकिन अब तीन महीने बाद भी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। इसके साथ ही कहा कि सरकार ने पहलवानों को जो आश्वासन दिया था वह झूठा निकला।
रोने लगीं पहलवान साक्षी और विनेश
भारत को पदक दिलाने वालीं साक्षी और विनेश फोगाट ने तो रोते हुए कहा कि पहलवानों को अब झूठा कहा जा रहा, जबकि वह सच्चाई की लड़ाई लड़ रही हैं। कोई फैसला न आने तक वे फिर से अब धरना-प्रदर्शन जारी रखेंगे। पहलवानों ने कहा कि रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) शक्तिशाली है तो क्या उन्हें न्याय नहीं मिलेगा?
बता दें कि जनवरी में खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने 23 जनवरी को एमसी मैरी कॉम के नेतृत्व में मामले की जांच के लिए निगरानी समिति का गठन किया था। इस समिति में कमांडर राजेश राजगोपालन, राधिका श्रीमान, बबिता फोगाट, योगेश्वर दत्त और तृप्ति मुरुगुंडे को शामिल किया गया था।
बृजभूषण शरण सिंह का पक्ष
अपने ऊपर लगे आरोपों पर कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह का कहना था, ''क्या ऐसा कोई खिलाड़ी है जो आकर कह सके कि कुश्ती संघ ने उसे प्रताड़ित किया? क्या उन्हें पिछले 10 साल से फेडरेशन से कोई समस्या नहीं थी? ये सारी बातें तब हो रही हैं जब से नए नियम लागू किए गए हैं। धरने पर बैठे पहलवानों ने ओलंपिक के बाद से किसी भी राष्ट्रीय टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं लिया है। यौन शोषण की कोई घटना नहीं हुई है। अगर ऐसा कुछ हुआ है तो मैं फांसी लगा लूंगा।''
यह भी बता दें कि बृजभूषण शरण सिंह फरवरी में पहलवानों के आरोपों की जांच कर रही निगरानी समिति के समक्ष पेश हुए थे। बृजभूषण तकरीबन तीन घंटे समिति की पूछताछ में रहे। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने यौन उत्पीड़न के सभी आरोपों को सिरे से नकार दिया था।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक बृजभूषण शरण सिंह के विरुद्ध विनेश फोगाट, साक्षी मलिक समेत अन्य महिला पहलवानों की ओर से लगाए गए यौन शोषण के आरोप साबित नहीं हुए। समिति ने अप्रेल के पहले सप्ताह में खेल मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। चूंकि यह रिपोर्ट सार्वजविक नहीं की गयी है इससे नाराज पहलवानों ने एक बार धरने की राह पकड़ी है। इसी महीने अप्रेल में पहलवान बजरंग पूनिया ने कहा था कि मामले की जांच के लिए नियुक्त निगरानी समिति की रिपोर्ट और भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) और उसके अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के विरुद्ध प्रमुख भारतीय पहलवान पहलवान में अदालत जाएंगे।
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