पेलोसी की ताइवान में लैंडिंग, देखता रह गया चीन
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ड्रेगन की गीदड़भभकियों और शक्ति प्रदर्शन के बीच अमेरिकी कांग्रेस की स्पीकर नैंसी पेलोसी मंगलवार शाम 8.15 बजे बेधडक़ ताइवान में लैंड कर गईं। पेलोसी के इस कदम से एशिया में डर का माहौल फैल गया है। चीन की ओर से लगातार मिल रही धमकियों के बाद भी वह ताइपे में लैंड हुई हैं। उन्हें कड़ी सुरक्षा में ताइवान पहुंचाया गया।
चीन की धमकियों के आगे नैंसी पेलोसी झुकीं नहीं और अमेरिका वायुसेना के विमान से वह राजधानी ताइपे पहुंचीं। बताया जा रहा है कि पेलोसी की सुरक्षा के लिए पहले से ही ताइवान के करीब अमेरिका नेवी के एक एयरक्राफ्ट समेत पांच युद्धपोत तैनात थे।
आखिर नैंसी पेलोसी के ताइवान जाने से चीन गुस्से में क्यों है? इसके कई कारण हैं। पहला कारण ये है कि चीन ताइवान को अपना बताता है। लेकिन, उसके अलावा एक बड़ा कारण ये है कि 1997 के बाद से नैंसी पेलोसी अमेरिका की एक निर्वाचित सर्वोच्च पद की अधिकारी हैं, जो ताइवान गई हैं। उनसे पहले तत्कालीन स्पीकर न्यूट गिंगरिच गए थे। चीन, वन चाइना पॉलिसी को अस्तित्व में लाया, जिसके चलते सिर्फ एक ही चीन के साथ राजनयिक संबंध रखे जा सकते हैं। गृह युद्ध के 30 वर्ष बाद अमेरिका ने ताइपे से अपने राजनयिक संबंधों को बीजिंग में शिफ्ट कर दिया। हालांकि अमेरिका ने कभी भी ताइवान पर चीन की संप्रभुता के दावे का समर्थन नहीं किया। उसके चीन के साथ अनौपचारिक संबंध रहे हैं।
पेलोसी की यात्रा को विशेषज्ञ बाइडेन प्रशासन की ओर से एक मिश्रित संदेश मान रहे हैं क्योंकि जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया तो अमेरिका सीधे लड़ाई में नहीं आया। लेकिन, वह ताइवान को दिखाना चाहता है कि उसके मामले में स्थिति ऐसी नहीं होगी। कई बार अमेरिका कहता रहा है कि वह ताइवान के साथ खड़ा रहेंगा और नैंसी पेलोसी की यात्रा इस दावे को और मजबूत कर रही है।
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