ले अब संभाल..! चीन के चहेते श्रीलंका की यूएन में उधेड़ी बखिया
अहसानफरामोशी की मिसाल बने भारत के पड़ोसी श्रीलंका को अब उसी की भाषा में समझाने का समय आ गया है। भारत ने मंगलवार, 13 सितंबर को पहली बार इस चीन के चहेते को दुश्मनी का ट्रेलर दिखाया। भारत ने श्रीलंका में तमिल अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र में कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए मानवाधिकारों के हनन को लेकर उसे घेर लिया।
भारत के इस रुख को इस दक्षिणी देश के लिए कड़ी चेतावनी और भविष्य के लिए नसीहत के रूप में देखा जा रहा है। श्रीलंका ने भारत की आपत्तियों के बावजूद चीन के खुफिया जहाज को हंबनटोटा बंदरगाह आने की इजाजत दी, वो भी ऐसे वक्त में जब एक दिन पहले ही भारत ने उसे डोर्नियर विमान दिया था। इतना ही नहीं, आर्थिक संकट के कारण जब देश जल रहा था तब श्रीलंका की भारत ने खुलकर मदद की थी। ऐसे में भारत की चिंताओं को नजरअंदाज करते हुए चीन को तवज्जो देना, श्रीलंका के प्रति भारत के रुख में बदलाव का कारण बताया जा रहा है।
संयुक्त राष्ट्र में पहली बार घिरा श्रीलंका
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 51वें सत्र में श्रीलंका में सुलह, जवाबदेही, मानवाधिकार को बढ़ावा देने पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय की रिपोर्ट पर एक परिचर्चा के दौरान भारत ने तमिल अल्पसंख्यकों का मुद्दा उठाया। भारत ने कहा कि मानवाधिकारों को बढ़ावा देना और उसकी रक्षा करना तथा संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों के अनुरूप रचनात्मक अंतराष्ट्रीय वार्ता एवं सहयोग करने में उसका सदा यकीन रहा है। विशेष क्षेत्र के लोगों के जातीय मुद्दे के राजनीतिक समाधान की अपनी प्रतिबद्धताओं पर श्रीलंका द्वारा प्रगति नहीं करने पर चिंता जताते हुए भारत ने सोमवार को 13वें संशोधन के पूर्ण क्रियान्वयन के लिए तत्काल एवं विश्वसनीय कार्य किये जाने की अपील की। साथ ही, भारत ने अभूतपूर्व आर्थिक संकट का सामना कर रहे देश में यथाशीघ्र प्रांतीय चुनाव कराने की भी अपील की।
क्यों बदला भारत का रुख, समझें
विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत ने किसी मामले में श्रीलंका की शिथिलता या उसकी कार्रवाइयों को खारिज करने का यह पहला कदम उठाया है। हालांकि, आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि श्रीलंका में मानवाधिकार के मुद्दे पर भारत की आम राय नहीं बदली है। उनके मुताबिक, श्रीलंका के मुद्दे पर भारत के मुख्य रूप से दो मौलिक विचार हैं। पहला यह कि श्रीलंकाई तमिलों के लिए न्याय, उनकी मर्यादा और शांति की मांग पर भारत जोर देता रहेगा और दूसरा यह कि श्रीलंका की एकता, स्थिरता और क्षेत्रीय अखंडता अक्षुण्ण रखने में भारत मदद करता रहेगा। अधिकारियों ने कहा कि भारत की नजर में ये दोनों, एक-दूसरे से अलग नहीं हैं बल्कि इनका आपस में पारस्परिक संबंध है।
चीन को भी नहीं बख्शा
भारत सरकार ने इस मौके पर चीन को भी काफी खरी-खोटी सुनाई। उसने कहा कि हिंद महासागरीय देशों के आर्थिक संकट बताते हैं कि कर्ज आधारित अर्थव्यवस्था की सीमाएं क्या होती हैं और वहां के लोगों के जीवन स्तर पर कितना नकारात्मक असर पड़ता है। इस वर्ष अकेले भारत ने श्रीलंका को संकट से उबरने के लिए 3.8 अरब डॉलर (करीब 3 खरब रुपये) की मदद की।
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