जब जलप्रलय और केदारनाथ मंदिर के बीच आ गई चट्टान., भीम शिला’ का अद्भुत रहस्य..!
<p><em><strong>पहाड़ से बाढ़ के साथ तेज रफ्तार से एक बहुत बड़ी चट्टान भी मंदिर की ओर आने लगी, लेकिन वह चट्टान मंदिर के पीछे करीबन 50 फुट की दूरी पर ही अचानक रुक गई</strong></em></p>
16 जून 2013 उत्तराखंड में आई भीषण बाढ़ ने हर जगह तबाही मचा दी थी, इससे केदारनाथ में भी हाहाकार वाला मंजर देखना पड़ा था। बिल्कुल जल प्रलय जैसा नजारा था। पहाड़ों में धंसी बड़ी-बड़ी मजबूत चट्टानें भी टूटकर पत्थर की तरह गिरने लगी। मंदिर पर भी खतरा मंडरा रहा था। तभी पीछे के पहाड़ से बाढ़ के साथ तेज रफ्तार से एक बहुत बड़ी चट्टान भी मंदिर की ओर आने लगी लेकिन वह चट्टान मंदिर के पीछे करीबन 50 फुट की दूरी पर ही अचानक रुक गई और सैलाब इससे टकराकर दो हिस्सों बंट गया और मंदिर एकदम सुरक्षित बच गया।
शिला का नाम किस आधार पर
उस दौरान मंदिर 300 से 500 लोग ने शरण ली हुई थी। इस घटना को 9 साल हो चुके हैं लेकिन ये शिला आज भी केदारनाथ के पीछे आदि गुरु शंकराचार्य की समाधि के पास मौजूद है। आज इस शिला को भीम शिला के नाम से जाना जाता है। लोग इस शिला की पूजा करते हैं।
शिला आखिर आई कहां से
इसी शिला ने बाढ़ में केदारनाथ धाम ज्योतिर्लिंग मंदिर की रक्षा की थी। आज भी साधुओं सहित केदारनाथ पहुंचने वाले हर श्रद्धालु के लिए ये रहस्य बना हुआ है कि आखिर मंदिर की चौड़ाई वाली शिला आई कहां से और कैसे ये अचानक मंदिर के पीछे कुछ दूरी पर आकर रुक गई। लोगों का कहना है कि क्या ये चमत्कार भोलेनाथ का है? या गुरु शंकराचार्य का था? जिनकी समाधि मंदिर के पीछे स्थित है या केवल एक संयोग है।
बड़े से बड़े पत्थर रुक गए थे
आज इस चमत्कार को हर कोई नमन करता है, क्योंकि अगर ये शिला समय पर सही जगह मंदिर के पीछे आकर नहीं रूकती, तो शायद तबाही का मंजर कुछ और ही होता। पूरे बढ़ के पानी और आने वाले बड़े पत्थरों को इसी शिला ने रोककर केदारनाथ मंदिर की रक्षा की थी।
भीम शिला नाम क्यों रखा गया
कई लोगों का कहना है कि सबसे पहले इस मंदिर को पांडवों ने बनवाया था। यहीं भीम ने भगवान शंकर का पीछा किया था। कुछ का कहना है कि इस बड़े से पत्थर को देखकर यही लगा जैसे भीम ने अपनी गदा को गाड़कर महादेव के मंदिर को बचा लिया। यही वजह है कि लोग इसे भीम शिला कहते हैं।
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