अरुण गोयल को चुनाव आयुक्त नियुक्त करने की जल्दबाजी में क्यों हुई..सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

<p><em><strong>सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अरुण गोयल की चुनाव आयुक्त के रूप में नियुक्ति पर केन्द्र का प्रतिनिधित्व कर रहे अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी से सवाल करते हुए कहा कि इतनी जल्दी क्यों थी। चुनाव आयुक्त के पद पर इतनी तेजी से नियुक्ति क्यों की गई।</strong></em></p>

अरुण गोयल को चुनाव आयुक्त नियुक्त करने की जल्दबाजी में क्यों हुई..सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब
25-11-2022 - 01:09 PM
21-04-2026 - 12:04 PM

न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने गोयल की नियुक्ति पर फाइल की जांच करने के बाद कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) डेटाबेस से चार नामों को शॉर्टलिस्ट करने में कानून मंत्री द्वारा अपनाए गये मानदंडों पर भी सवाल उठाया। बेंच में जस्टिस अजय रस्तोगी, जस्टिस अनिरुद्ध बोस, जस्टिस ऋषिकेश रांग और जस्टिस सीटी रविकुमार शामिल हैं। लंबी सुनवाई के बाद बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया। बेंच द्वारा पूछे गए सवालों पर अटर्नी जनरल ने तर्क दिया कि अदालत को नियुक्ति पर मिनी ट्रायल नहीं करना चाहिए हालांकि बैच ने उनसे बताने के लिए कहा कि इतनी जल्दबाजी में नियुक्ति क्यों की गई | पीठ ने पूछा उसी दिन प्रक्रिया शुरू हुई उसी दिन क्लीयरेंस हुआ उसी दिन नियुक्ति कर दी गई |

अटॉर्नी जनरल ने दिए जवाब

अटॉर्नी जनरल ने कहा, 'प्रक्रिया में कुछ गलत नहीं हुआ। पहले भी 12 से 24 घंटे में नियुक्ति हुई है। ये चार नाम डीओपीटी के डेटाबेस से लिये गए। वह सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है।' उन्होंने आगे बताया, 'नाम लिये जाते समय वरिष्ठता, रिटायरमेंट उम्र आदि को देखा जाता है। इसकी पूरी व्यवस्था है। आयु की जगह बैच के आधार पर वरिष्ठता मानते है।'

क्या है मामला

दरअसल, 1985 बैच के आईएएस अरुण गोयल ने उद्योग सचिव पद से 18 नवंबर को वीआरएस लिया था। इस पद से उन्हें 31 दिसंबर को रिटायर होना था। गोयल को 19 नवंबर को चुनाव आयुक्त नियुक्त कर दिया गया। वह मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार और चुनाव आयुक्त अनूप चंद्र पांडेय के साथ निर्वाचन आयोग का हिस्सा रहेंगे। इस नियुक्ति पर सीनियर एडवोकेट प्रशांत भूषण ने एक याचिका दायर कर सवाल उठाया है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार से इस मामले पर सुनवाई शुरू की है। गुरुवार , 24 नवंबर को सुनवाई का तीसरा दिन रहा।


न्यायमूर्ति जोसेफ ने डीओपीटी के डेटाबेस से चार नामों को चुनने में कानून मंत्री द्वारा अपनाए गए मानदंडों पर विशेष रूप से सवाल किया। पीठ ने कहा कि 18 नवंबर को मंत्री ने नामों को चुना और फाइल भी उसी दिन पेश की गई | यहां तक कि प्रधानमंत्री ने भी उसी दिन नाम की सिफारिश की। हम कोई टकराव नहीं चाहते हैं। कोर्ट ने कहा कि यह पद 15 मई से खाली था,और अब इस पर बिजली की रफ्तार से काम किया | न्यायमूर्ति जोसेफ नेकहा कि अदालत एक येसमैन (हां में हां मिलाने वाला व्यक्ति) की नियुक्ति को लेकर चिंतित है और पूछा कि कानून मंत्री द्वारा आयु मानदंड के आधार पर सैकड़ों लोगों के डेटा से चार नामों को शॉर्टलिस्ट करने का क्या आधार है। सुपर फास्ट तरीके से गोयल की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए पीठ ने टिप्पणी की कि 24 घंटे से भी कम समय में प्रक्रिया पूरी और अधिसूचित नहीं की गई। पीठ में न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला भी शामिल हैं। सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत दाखिल किए आवेदनों के जवाब 'पोर्टल के जरिए दिए जाएंगे अभी तक शीर्ष अदालत के संबंध में आरटीआई आवेदन डाक के माध्यम से जाने थे।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।