ताकत से लेंगे ताइवान ! श्वेत पत्र में जाहिर कर दिए ड्रेगन ने अपने इरादे
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चीन ने ताइवान को लेकर बरसों से जारी अपनी नीति में बड़ा बदलाव किया है। बुधवार को जारी चीन के आधिकारिक श्वेत पत्र में बताया गया है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ताइवान को पहले की तुलना में अब कम स्वायत्तता देने के मूड में हैं। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि चीनी सेना अब ताइवान पर हमला करने के लिए स्वतंत्र है, बस आदेश का इंतजार है।
श्वेत पत्र को ताइवान के चारों ओर चार दिनों तक चले चीनी सैन्य अभ्यास के तुरंत बाद जारी किया गया है। ताइवान ने कहा था कि चीन का यह युद्धाभ्यास दरअसल हमले का रिहर्सल था। बता दें कि अमेरिकी हाउस की अध्यक्ष नैन्सी पेलोसी की ताइवान यात्रा से चीन भडक़ा हुआ है।
चीन ने 1993 और 2000 में ताइवान पर पिछले दो श्वेत पत्रों में कहा था कि वह पुनर्मिलन की शर्तों को प्राप्त करने के बाद ताइवान में रहने के लिए सैनिक या प्रशासनिक कर्मियों को नहीं भेजेगा। इसका मकसद ताइवान को यह आश्वासन देना था कि वह चीन में मिलने के बाद भी अपनी स्वायत्तता का आनंद लेता रहेगा। हालांकि, नए श्वेत पत्र में इस तरह का कोई भी ऑफर नहीं दिया गया है।
ताइवान ने एक देश दो प्रणाली को किया खारिज
ताइवान से सभी प्रमुख राजनीतिक दल शुरू से ही चीन की "एक देश, दो प्रणाली" वाले प्रस्ताव को खारिज करते आये हैं। ताइवान में हुए जनमत संग्रह में भी इस प्रस्ताव को समर्थन नहीं मिला है। ताइवान ने चीन के श्वेत पत्र का निंदा करते हुए कहा कि यह झूठ से भरा हुआ है और तथ्यों की अवहेलना करता है। ताइवान की मेनलैंड अफेयर्स काउंसिल ने यह भी कहा कि रिपब्लिक ऑफ चाइना (ताइवान) एक संप्रभु देश है। काउंसिल ने कहा कि केवल ताइवान के 2.3 करोड़ लोगों को ही ताइवान के भविष्य पर निर्णय लेने का अधिकार है और वे एक निरंकुश शासन द्वारा निर्धारित परिणाम को कभी स्वीकार नहीं करेंगे।
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