डबल डिजिट में विकास दर...! राजस्थान नंबर-2, टॉप 5 में भाजपा शासित कोई राज्य नहीं
<p><em><strong>वित्तीय वर्ष 2021-22 में आर्थिक विकास दर के मामले में राजस्थान देश में दूसरे स्थान पर है। बड़ी बात यह है कि राजस्थान ने डबल डिजिट (11.04 प्रतिशत) की विकास दर हासिल की है। पहले स्थान पर आंध्रप्रदेश है, जहां की विकास दर 11.43 है।</strong></em></p>
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की विकास दर 8.7 प्रतिशत है। भाजपा शासित राज्यों की विकास दर काफी कम रही है। हर साल अगस्त माह में केन्द्र सरकार का वित्त मंत्रालय का सांख्यिकी विभाग देश और राज्यों की विकास दर का आंकड़ा जारी करता है। इस बार देश के 19 राज्यों की विकास दर का आकलन किया गया है। जिसकी अंतरिम रिपोर्ट उसी वक्त तैयार हो गई थी। फाइनल और अधिकृत रिपोर्ट 15 से 20 दिन पहले राज्यों को भेजी गई है।
राजस्थान के वित्त विभाग (फाइनेंस) और आयोजना विभाग (प्लानिंग) के पास भी यह रिपोर्ट आ गई है। आयोजना विभाग के प्रमुख शासन सचिव (आईएएस) भवानी सिंह देथा के अनुसार सीएम गहलोत के सक्षम नेतृत्व में राजस्थान ने शानदार ग्रोथ हासिल की है।
गुजरात- महाराष्ट्र के आंकड़े नहीं
किन्हीं कारणों से केन्द्र व राज्य सरकारों के आंकड़ों में कुछ परिवर्तन आने से गुजरात और महाराष्ट्र प्रदेश के आंकड़ों को शामिल नहीं किया गया है। लेकिन सूत्रों का अनुमान है कि उन दोनों राज्यों की विकास दर लगभग 9 प्रतिशत रही है।
10 साल पहले 2.50 प्रतिशत विकास दर
वर्ष 2011-12 के दौरान राजस्थान की वार्षिक दर मात्र 2.50 प्रतिशत थी। यह संयोग था कि तब केन्द्र में भी कांग्रेस (यूपीए) की सरकार थी और राजस्थान में भी कांग्रेस सरकार थी। सीएम भी तब अशोक गहलोत ही थे। आज केन्द्र में भाजपा की सरकार है और प्रदेश में कांग्रेस की सरकार। सीएम एक बार फिर अशोक गहलोत ही हैं। प्रदेश ने दस साल बाद नीचे से दूसरे स्थान से उठकर ऊपर से दूसरे स्थान की छलांग लगा पाने में कामयाबी हासिल की है।
टॉप 5 में कोई भाजपा शासित राज्य नहीं
विकास दर के मामले में टॉप 5 राज्यों में आंध्रप्रदेश, राजस्थान, बिहार, तेलंगाना और दिल्ली हैं। छठे स्थान पर ओडिशा और फिर सातवें स्थान पर भाजपा शासित राज्य मध्यप्रदेश हैं। पहले छह स्थानों वाले राज्यों में गैर भाजपाई सीएम जगनमोहन रेड्डी, अशोक गहलोत, नीतीश कुमार, के. चंद्रशेखर राव, अरविंद केजरीवाल और नवीन पटनायक की सरकारें हैं। राजनीतिक तौर पर देखा जाए तो पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सहित इन्हीं मुख्यमंत्रियों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनौती देने वालों के रूप में देखा जाता है।
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