चंद रोज पहले जम्मू-कश्मीर में लीथियम का भंडार मिला और अब आतंकी संगठन से मिली धमकी..!
<p><em>सफेद सोना यानी लीथियम की रिफाइनिंग सरल नहीं होती लेकिन जम्मू-कश्मीर में मिले इसके भंडार को लेकर अभी से परेशानियां शुरू हो गई हैं। राज्य में सक्रिय आतंकी संगठन<strong> </strong>एंटी-फासिस्ट फ्रंट (Anti-Fascist Front) ने इसके उत्खनन को लेकर धमकी दी है। इस संगठन ने सोमवार, 13 फरवरी को एक पत्र जारी करके कहा है कि वह किसी भी स्थिति में जम्मू-कश्मीर के संसाधनों के ‘शोषण’ और ‘चोरी’ की अनुमति नहीं देगा।</em></p>
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक इस आतंकवादी संगठन ने कहा है कि यह संसाधन जम्मू-कश्मीर के लोगों के हैं और जम्मू-कश्मीर के लोगों की बेहतरी के लिए इनका इस्तेमाल होना चाहिए. आतंकी संगठन ने कंपनियों को धमकी देते हुए आगे कहा कि जो भी कंपनी जम्मू-कश्मीर में खनन का काम करेगी, उस पर हमला होगा।
उल्लेखनीय है कि भारत के केंद्रीय खान मंत्रालय की घोषणा के अनुसार जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले के सलाल-हैमाना क्षेत्र में 59 लाख टन लीथियम मिला है। यह गांव माता वैष्णो देवी की पहाड़ियों के पास ही स्थित है। यह पहला प्रमुख लिथियम का भंडार है जो भारत में पाया गया है। इससे पूर्व बीते वर्ष कर्नाटक के मारवागल्ला में भी 1600 टन लिथियम पाया गया था।
बता दें कि लीथियम एक दुर्लभ खनिज और अलौह धातु है। इसका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों, मोबाइल फोन, लेपटॉप और डिजिटल कैमरे की रीचार्जेबल बैटरी में किया जाता है। वर्तमान परिस्थितियों में भारत लीथियम के लिए पूर्ण रूप से आय़ात पर ही निर्भर है लेकिन अब लगातार इसकी मांग बढ़ती जा रही है। आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बढ़ने के लिए यह भंडार काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बता दें कि सरकार देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री को बढ़ावा देकर अपने डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों को पूरा करने की योजना पर काम कर रही है।
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