केरल बना ‘केरलम्’, तो शशि थरूर ने उठाया भाषाई सवाल
केंद्र सरकार की ओर से केरल का नाम बदलकर ‘केरलम्’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद मंगलवार को जहां दिल्ली में संवैधानिक प्रक्रिया को लेकर हलचल तेज हो गई, वहीं केरल में शब्दों और भाषा को लेकर रोचक बहस..
नयी दिल्ली/तिरुवनंतपुरम। केंद्र सरकार की ओर से केरल का नाम बदलकर ‘केरलम्’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद मंगलवार को जहां दिल्ली में संवैधानिक प्रक्रिया को लेकर हलचल तेज हो गई, वहीं केरल में शब्दों और भाषा को लेकर रोचक बहस छिड़ गई। इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Shashi Tharoor ने राज्य के प्रस्तावित नए नाम ‘केरलम्’ पर व्यंग्यपूर्ण और चुटीली टिप्पणी कर सबका ध्यान खींच लिया।
प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता वाली केंद्रीय कैबिनेट द्वारा केरल का नाम बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने के तुरंत बाद, शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक भाषाई पहेली सामने रखी।
थरूर ने लिखा, “निस्संदेह यह एक अच्छी बात है, लेकिन हम अंग्रेज़ीभाषियों के लिए एक छोटा-सा भाषाई सवाल है: अब नए ‘केरलम्’ के निवासियों के लिए ‘Keralite’ और ‘Keralan’ जैसे शब्दों का क्या होगा?”
उन्होंने आगे मज़ाकिया अंदाज़ में कहा, “‘Keralamite’ किसी सूक्ष्म जीव (माइक्रोब) जैसा लगता है और ‘Keralamian’ किसी दुर्लभ खनिज जैसा! CMO Kerala शायद इस चुनावी उत्साह से पैदा हुए नए शब्दों के लिए कोई प्रतियोगिता शुरू करना चाहे।”
संवैधानिक प्रक्रिया शुरू
केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के साथ ही इस नाम परिवर्तन की प्रक्रिया अगले चरण में पहुंच गई है। इसकी शुरुआत 24 जून 2024 को हुई थी, जब Kerala Legislative Assembly ने राज्य का नाम ‘केरल’ से बदलकर ‘केरलम्’ करने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया था।
अब कैबिनेट की स्वीकृति के बाद, President of India संविधान के अनुच्छेद 3 के प्रावधान के तहत केरल अल्टररेशन ऑफ नेम बिल, 2026 को राज्य विधानसभा के पास उसकी राय के लिए भेजेंगे।
जब विधानसभा अपनी राय केंद्र को भेज देगी, तब भारत सरकार आगे की प्रक्रिया शुरू करेगी। इसके बाद संसद में विधेयक पेश करने के लिए राष्ट्रपति की सिफारिश ली जाएगी, ताकि संविधान की पहली अनुसूची में राज्य के नाम को औपचारिक रूप से बदला जा सके।
केरल सरकार पहले ही केंद्र से अनुरोध कर चुकी थी कि संविधान में संशोधन कर अनुच्छेद 3 के अनुरूप ‘केरल’ के स्थान पर ‘केरलम्’ नाम दर्ज किया जाए।
राजनीतिक और सांस्कृतिक प्रभाव
हालांकि नाम परिवर्तन को भाषाई और सांस्कृतिक पहचान के सशक्तिकरण के रूप में देखा जा रहा है लेकिन शशि थरूर की टिप्पणी ने इस गंभीर संवैधानिक और राजनीतिक घटनाक्रम में हल्के-फुल्के हास्य का तड़का लगा दिया।
उनकी पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई और इस पर बहस शुरू हो गई कि भविष्य के ‘केरलम्’ के निवासियों को अंग्रेज़ी में आखिर क्या कहा जाए।
राजगोपालाचारी की प्रतिमा पर भी बोले थरूर
इससे एक दिन पहले, सोमवार रात शशि थरूर ने Rashtrapati Bhavan में C. Rajagopalachari की प्रतिमा स्थापित किए जाने पर भी खुशी जताई थी।
थरूर ने लिखा, “वे इसके पहले भारतीय अधिवासी थे—भारत के एकमात्र भारतीय गवर्नर-जनरल—जब हम गणराज्य नहीं बने थे और बाद में उन्होंने अपना पद नए राष्ट्रपति को सौंप दिया।”
उन्होंने कहा कि वे लंबे समय से राजगोपालाचारी के विचारों से प्रभावित रहे हैं और छात्र जीवन में उनकी Swatantra Party के प्रबल समर्थक थे।
थरूर ने राजगोपालाचारी के मूल्यों को “उदार अर्थव्यवस्था और मुक्त उद्यम के समर्थन के साथ सामाजिक न्याय का संतुलन” बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि उनकी जड़ें “भारतीय सभ्यता और धार्मिक आस्था में गहराई से जुड़ी थीं, लेकिन उनमें सांप्रदायिक कट्टरता का लेशमात्र भी नहीं था।”
अंत में थरूर ने टिप्पणी की, “यह दुखद है कि आज उनके रास्ते पर चलने वाले बहुत कम लोग बचे हैं।”
What's Your Reaction?